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एक आरोपी रोहिताश को उम्रकैद

6 वर्ष पहले
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बहुचर्चितविजयपाल हत्याकांड में मंगलवार को एडीजे सीकर क्रम 2 ने आरोपी रोहिताश बिडोली को उम्रकैद की सजा सुनाई है। तीन आरोपी हरिसिंह, बलबीर सुरेश बरी हो गए हैं। कुख्यात बदमाश राजू ठेहट मोहन मांडेता सहित अन्य के खिलाफ चालान देरी से पेश होने के कारण फिलहाल उनके खिलाफ मामला लंबित रखा गया है।

अपर लोक अभियोजक सावित्री बाटड़ ने बताया कि 22 जून 2005 की रात करीब तीन बजे गोठड़ा तगेलान निवासी विजयपाल सांवत का बास बुच्यासी निवासी भंवर लाल रणवां जीप से पलसाना से रानोली की तरफ रहे थे। इसी दौरान एक पिकअप अन्य गाड़ियों में सवार होकर आए बदमाशों राजू ठेहट, मोहन मांडेता, रोहिताश बिडोली, बलबीर, हरिसिंह अन्य ने उनकी जीप को रुकवा लिया। आरोपियों ने उन पर लाठी सरियों से ताबड़तोड़ वार किए। जिससे विजयपाल की मौत हो गई भंवरलाल गंभीर रूप से घायल हो गए। मामले में राजू ठेहट मोहन मांडेता करीब डेढ़ साल पहले ही गिरफ्तार हुए हैं। ऐसे में इनके खिलाफ चार्जशीट बाद में पेश की गई।

कोर्टपरिसर से किया था अपहरण का प्रयास : इसमामले में एकमात्र चश्मदीद गवाह भंवरलाल को बयान बदलने के लिए ठेहट के गुर्गों ने कई बार धमकी दी थी। पिछले साल कोर्ट में बयान देने आते वक्त ठेहट के भाई अन्य ने उसके अपहरण का प्रयास किया था। पुलिस ने कोर्ट से ही इनको गिरफ्तार कर लिया था।

गैंगवार के कारण हुई थी हत्या

विजयपाल की हत्या राजू ठेहट बलबीर बानूड़ा की गैंग में रंजिश के कारण हुई थी। इससे पहले तक ठेहट बानूड़ा एक ही गैंग में थे। जीणमाता में शराब ठेके की बात पर दोनों की दोस्ती दुश्मनी में बदल गई थी। विजयपाल बानूड़ा का साला था। जिसने भंवरलाल के साथ मिलकर ठेके पर काम करने वाले युवकों के साथ मारपीट कर दी थी। इसके बाद ठेहट गैंग ने बदला लेने के लिए विजयपाल भंवरलाल पर हमला किया था।