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नेशनल हाईवे पर सर्वे करने में बाईपास रखना भूल गए इंजीनियर

5 वर्ष पहले
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बांसवाड़ा। नेशनलहाईवे पर सर्वे करने में बाईपास का प्रावधान रखना इंजीनियर भूल गए या फिर उन्होंने इसकी जरूरत ही महसूस नहीं की। अब भी यदि यह संभव नहीं हुआ तो आने वाले समय में सड़क हादसों में और ज्यादा इजाफा हो सकता है। नेशनल हाईवे-927 सरूपगंज से खेरवाड़ा, डूंगरपुर, सागवाड़ा, गढ़ी, बांसवाड़ा, रतलाम मार्ग पर एक भी बाईपास का प्रावधान नहीं रखा गया है, जिसके चलते खासकर मानसून सीजन में वाहन चालकों के लिए ज्यादा परेशानी खड़ी हो सकती है।

गुड़गांव-हरियाणा की एक कंपनी द्वारा तैयार किए जा रहे डिटेल सर्वे में बांसवाड़ा-डूंगरपुर जिलों के एक भी कस्बे में अब तक बाईपास रखे जाने की जरूरत ही नहीं लगी और ही इस आशय का निकट भविष्य के लिए प्रावधान रखा गया है। देहात ही नहीं, बल्कि शहरी सीमा में ही इसकी ज्यादा जरूरत है। यदि भविष्य में बाईपास का प्रावधान रखा जाए तो इससे एक-दूसरे शहरों-कस्बों के बीच दूरी कम हो सकती है, वहीं दूसरी ओर परतापुर-गढ़ी-सागवाड़ा के घुमावदार मोड़ों पर सड़क हादसे कम हो सकते हैं। सर्वे करने वाली कंपनी की ओर से लिखित में स्पष्ट किया गया है कि उनके द्वारा इन स्थानों पर डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट में फिलहाल बाईपास का प्रावधान नहीं किया गया है। इस कंपनी की ओर से लिखित में बताया गया है कि इन दिनों सागवाड़ा बाईपास के सर्वे का कार्य चल रहा है। इस कंपनी को बांसवाड़ा शहरवासियों की जरूरत बताते हुए सुझाव भेजे गए हैं, जिसमें बताया है कि यदि बांसवाड़ा शहर में रतलाम-प्रतापगढ़ मार्ग को जोड़ने पांच किलोमीटर का बाईपास, रतलाम-दाहोद मार्ग को जोड़ने 15 किमी का बाईपास, गढ़ी-परतापुर कस्बे के बाहर 7 किलोमीटर लंबा बाईपास बनाया जाए तो बांसवाड़ा से सागवाड़ा और डूंगरपुर की दूरी 13 किलोमीटर कम हो जाएगी। आरटीई एक्सपर्ट गोपीराम अग्रवाल ने इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग जयपुर के मुख्य अभियंता को चारों कस्बों के लिए बाईपास का प्रावधान डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट में सम्मिलित करने की जरूरत बताते हुए जरूरी सुझाव भेजे हैं।

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