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नहीं रही निशुल्क दवा योजना की दवाइयां, जांचें भी हो गई बंद

7 वर्ष पहले
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गढ़ीउपखंड क्षेत्र के एकमात्र परतापुर के सामुदायिक हॉस्पिटल में इन दिनों तो नि:शुल्क दवा योजना की पूरी दवाइयां रही है और ही रोगियों की जांचें ही हो पा रही है। यही नहीं यह अस्पताल वर्तमान में मात्र दो डॉक्टरों के भरोसे ही चल रहा है।

जानकारी के अनुसार परतापुर अस्पताल में नि:शुल्क दवा योजना की दवाइयों की खेप आगे से नहीं रही है। इसके चलते अस्पताल प्रशासन के सामने परेशानी खड़ी हो गई है। अस्पताल में पहले करीब 300 से अधिक तरह की दवाइयां मिल रही थी। जबकि, वर्तमान में मुश्किल से 120 प्रकार की दवाइयां ही उपलब्ध हो रही है, जिससे जरूरतमंद रोगियों को भी बाजार से ही दवाइयां खरीदनी पड़ रही है। यही नहीं परतापुर अस्पताल में वर्तमान में स्थाई तौर पर सिर्फ दो ही डाॅक्टर कार्यरत हैं, जिससे रोगियों को परेशानी होती है। यहां अस्पताल प्रभारी, स्त्रीरोग विशेषज्ञ प्रतिनियुक्ति पर लगे हुए हैं। वहीं, पिछले दिनों डाॅ. पीपी शर्मा के सेवानिवृत होने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई।

एमआरएस से राशि ली उधार

^समय-समय पर उच्चाधिकारियों को स्टाफ अन्य समस्याओं के बारे में बताया जाता रहा है। आगे से बजट का अभाव बताया जा रहा है। डाॅ.श्याम मालव- अस्पताल प्रशासन प्रभारी।

इस अस्पताल में गढ़ी क्षेत्र के दूरदराज के गांवों से तथा आनंदपुरी क्षेत्र से प्रतिदिन मरीज उपचार के लिए आते हैं। जिसके चलते अस्पताल में स्टाफ के साथ ही सभी इंतजामात होना आवश्यक है। ऐसे में कस्बेवासियों को राज्यमंत्री जीतमल खांट से जरुर आस बंधी है कि मंत्री के क्षेत्र में अब सुविधाएं अवश्य ही मुहैया होगी।

कस्बेवासियों को मंत्री से जगी आस

सीबीसी मशीन पिछले कई माह से बंद पड़ी हुई है। इसका कारण सोल्यूशन नहीं मिलना बताया जा रहा है। पूर्व में सोल्यूशन सरकार द्वारा अधिकृत उदयपुर की एक फर्म से खरीदा गया था, जिसकी करीब 80 हजार रुपए की राशि बकाया है। इसके कारण उसने सोल्यूशन देना बंद कर दिया है। इसके कारण हिमोग्लोबिन, ब्लड प्रेशर सहित अन्य जांचें नहीं हो पा रही है। इसके साथ ही यहां लगी एक्सरे मशीन भी पूरी तरह से नकारा हो चुकी है।

सीबीसी मशीन बंद

परतापुर अस्पताल में जांच के लिए पर्ची बनाने खिड़की पर लगी लाइन।