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अफसरों ने मंत्रिमंडल के नियम तोड़कर बना दीं नई पंचायतें

7 वर्ष पहले
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सीकर. ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन और नई पंचायतें बनाने में मंत्रिमंडलीय उपसमिति के स्तर पर बनाए गए नियमों से छेड़छाड़ के अधिकार अफसरों के पास नहीं थे। इसके बाद भी नई ग्राम पंचायतें बनाने और पुनर्गठन में सभी नियमों को दरकिनार कर दिया गया। इनमें 34 नई ग्राम पंचायतें प्रस्तावित हैं। अब विरोध के स्वर भी तेज हो गए हैं। जिला स्तर पर ही 157 आपत्तियां आई हैं। जबकि हर एसडीएम के पास भी 500 से ज्यादा आपत्तियां चुकी हैं।

ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के शासन सचिव राजेश यादव ने राज्य के कलेक्टरों को पत्र लिखकर कहा है कि ग्राम पंचायतों के गठन के लिए मंत्रिमंडल द्वारा तय किए गए नियमों की पालना नहीं की गई है। अधिकारियों के स्तर पर इनमें कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। ग्राम पंचायत के गठन में कोई दिक्कत हो तो पहले सरकार से मार्गदर्शन लेना होगा। सरकार की ओर से जारी पत्र के बाद साफ हो गया है कि नियमों के विपरीत बनाई गई ग्राम पंचायतें निरस्त हो सकती है। क्योंकि फैसला सरकार के स्तर पर ही होना है। इससे पहले 24 सितंबर तक कलेक्टर को टिप्पणी के साथ रिपोर्ट भेजनी है। एडीएम भरतलाल मीना ने बताया कि एसडीएम से टिप्पणी मांगी गई है। 24 सितंबर तक सरकार को प्रस्ताव भेज दिए जाएंगे।

पंचायत समिति बनाने में भी की मनमानी

नई पंचायत समिति में न्यूनतम 30 ग्राम पंचायत रखी जानी थीं लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नई बनाई जा रही पंचायत समिति नेछवा में 21 और पाटन में 24 ही ग्राम पंचायतें ही रखी गई है।

अब सभी एसडीएम से पूछा- क्या नियमों की पालना की गई

अब नोडल अधिकारी एडीएम ने सभी एसडीएम को पत्र लिखकर यह पूछा है कि प्रस्तावित ग्राम पंचायत पुनर्गठन में नियमों की पालना की गई है। अगर किसी कारण से शिथिलता जरूरी है तो उसके बारे में भी बताएं। सभी एसडीएम ने यह निर्देश गांवों में बढ़ रहे विरोध और सरकार की चिट्ठी के बाद जारी किए गए हैं।

इन सवालों के चाहिए जवाब

>एसडीएम ने किस आधार पर और किनके दबाव में नियमों को दरकिनार कर दिया?
> गांवों की दूरी ग्राम पंचायत से 10 से 15 किमी तक किस आधार पर की गई। क्या ग्रामीणों की परेशानी को ध्यान में ही रखा गया।
> जिले में 157 गांवों के लोगों ने एसडीएम के फैसलों पर सवाल उठाए हैं तो इनका जवाब कौन देगा?
> क्या अफसर मंत्रिमंडलीय उपसमिति से भी बड़े हैं।