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खुद ने घोटाला किया, खुद ने ही कर डाली जांच
कस्बेके रामलीला मैदान में रविवार रात श्री भर्तृहरि विचार मंच की ओर से सामाजिक कार्यकर्ता नितेन्द्र मानव की अध्यक्षता कन्हैया लाल मीणा के विशिष्ट आतिथ्य में कवि सम्मेलन हुआ। कवि भूपेन्द्र भरतपुरी ने सरस्वती वंदना से शुभारंभ किया। ब्यावर के कवि सुरेन्द्र दुबे ने जीवन देवासुर संग्राम सभी भ्रमित जी रहे नर नार, क्या करने आये थे जग में, क्या करने लगे काम, राजनीति पर करारा व्यंग्य करते खुद ने घोटाला किया, खुद ने ही कर डाली जांच, दाल में काला है सुनाकर श्रोताओं को लोटपोट कर दिया।
कवयित्री डॉ.कीर्ति काले ने क्या सिंहों का देश चूहों से हारा है, तन से दूर भेले हो जाऊं, मन से दूर ना होना, यादों की खुशबू से महके मन का कोना कोना किसी का बर्तन भरा हुआ किसी का बर्तन खाली, जग की रीत निराली सुना कर देश भक्ति प्रेमरस में डू बोए रखा। कवि रमेश बांसुरी ने जीवन को एक ढकेल के समान बताते हुए सुनाया कि जीवन है दो दिन का, आगे मौत चुड़ैल है, तेरी काया एक ढकेल है, तथा मैं एक बंदर तू मदारी चाहे जैसे तू नचावै वाह रे बांके बिहारी कविता सुनाकर जीवन की यथार्थ से अवगत करवाया। चितौडग़ढ़ से आए कवि रमेश शर्मा ने शहरों की अपेक्षा गांवों में अधिक मिठास बताते हुए एक नायक नायिका के माध्यम से कहा, प्रिय गांव तू मेरे चल वहां बोली में मिठास है, यहां बोतल में भरा अहसास है, सुनाकर श्रोताओं को ग्रामीण संस्कृति से अवगत कराया। कवि प्रवेन्द्र पंडित ने तेज चलने की मत सोचो अब राह समतल नहीं है। कवि राजेश सराधना ने सबला होने के बाद भी नारी को अबला बताते हुए वर्तमान महिला के हालात पर प्रकाश डाला। इससे पूर्व श्री भर्तृहरि विचार मंच के पुरुषोत्तम कृष्ण मिश्रा, महेश पारीक, अशोक मंगल, महेश थानेदार आदि ने अतिथियों कवियों को माला पहना कर स्वागत किया।
पावटा. कस्बेमें आयोजित कवि सम्मेलन में श्रोताओं को कविताएं सुनाते कवि।