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हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक टकसोला औलिया बाबा की मजार

5 वर्ष पहले
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पावटा ग्रामीण |टसकोलागांव में मुख्य नहर पुलिया से बावड़ी की तरफ जाने वाले रास्ते के पास में वर्षों पूर्व गांव के लोगों की ओर से बनाई गई औलिया बाबा की मजार हिन्दू-मुस्लिम एकता को दर्शाती है। यहां हर समुदाय के लोग आकर मंन्नतें मांगते हैं। टसकोला गांव के नहीं, आसपास के दर्शनों को गांवों के हर जाति संप्रदाय के लोग अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की मन में आस लेकर औलिया बाबा की मजार के पास शीश झुकाते हैं तथा मनोकामना पूरी करने का आशीर्वाद लेते हैं। एक ही परिसर में बनी औलिया बाबा की मजार शिवालय हिन्दू-मुस्लिम एकता को दर्शाते हैं। टसकोला गांव के लोगों ने बताया कि कि सैकड़ों वर्ष पूर्व लखनऊ के नवाब के एक पुत्र जिसका नाम औलिया था, बचपन से ही तपस्या में लग्न रहता था। उसने किसी कारण से टसकोला गांव में आकर गांव के मध्य में नहर पुलिया के पास बैठकर कठाेर तपस्या की तथा लोगों को भूत और भविष्य की जानकारी देने लगे। इनकी तपस्या से प्रभावित होकर लोग धीरे-धीरे इनके पास आकर अपने भूत भविष्य के बारे में जानने लगे। लोगों का कहना था कि इनके द्वारा बताए गए मार्ग के अनुसार जो भी लोग कार्य करते थे, वे सभी कार्य सहज रूप से हो जाते थे, जिससे इनकी मान्यता और बढ़ने लगी। ग्रामीणों का यह भी कहना है की औलिया बाबा एक बछड़ा भी रखते थे। उसके द्वारा उद्दंडता करने पर उसे खेत की जुताई के कार्य के लिए किसानों को दे देते थे, लेकिन कुछ दिनों बाद ही उसे वापस ले लेते थे, उनकी इस प्रेम भावना को देख कर लोग उनसे और भी प्रभावित थे तथा इसी बात को लेकर सभी किसानों अन्य लोगों ने पौष माह की द्वितीया को औलिया बाबा के नाम की जोत जलाकर पूजा करने इस दिन अपना खेती का कार्य अन्य कार्य बन्द रखने का निर्णय लिया। ग्रामीणों का यह भी मानना है कि एक बार पशुओं को चराने की बात को लेकर टसकोला भौनावास गांव के लोगों के बीच गांव की जमीन की सीमा को लेकर विवाद हुआ, विवाद इतना बढ़ गया था कि दोनों गांवों के बीच लड़ाई-झगड़े होने लगे, लेकिन औलिया बाबा ने दोनों गांवों के लोगों को इस तरह से समझाया कि वे लोग लड़ाई-झगड़े को छोड़ कर सदा के लिऐ इनके भक्त बन गए।

मजारमें झुकाते हैं शीश और शिवालय में लगाते हैं धौकऔलिया बाबा की जिस परिसर में मजार-समाधि स्थल बना हुआ है, उसी के पास एक शिवालय बना हुआ है, शिवालय में जाने वाले सभी लोग मजार में भी शीश झुकाते हैं तो मजार पर जाने वाले लोग भी शिवालय में धोक लगाते हैं। विवाह होने के बाद सभी समाज सम्प्रदाय के लोग औलिया बाबा की मजार शिवालय में धौक लगाकर अपना वैवाहिक जीवन सफल होने की कामना करते हैं। इस तरह यह स्थल सभी के लिए एकता का प्रतीक बना हुआ है।

पावटा ग्रामीण.टसकोला मेंएक ही परिसर जिसमें औलिया बाबा की मजार शिवालय बना हुआ है

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