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सत्संग में जाने से मनुष्य जीने की कला सीखता हंै

7 वर्ष पहले
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बगड़ीगांव के सीताराम मंदिर परिसर में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा एवं गौरक्षा महायज्ञ धार्मिक अनुष्ठान के तहत मंगलवार को कथा में भागवताचार्य सच्चिदानंद बाल प्रभू वृंदावन ने कहा कि भागवत कथा सत्संग में जाने से मनुष्य जीने की कला सीख सकता है। आज का मनुष्य किसी किसी समस्या से घिरा रहता है। वह स्वयं के दुख से कम एवं अन्य के दुख से ज्यादा दुखी होता है। उसे इस दु:ख से मुक्ति पाने के लिए कथा सत्संग में जाना चाहिए। कथा दौरान महिलाओं ने भक्ति भजनों पर नृत्य किया। कथा का विश्राम आरती एवं प्रसादी वितरण पर हुआ। कथा में बगड़ी सहित आसपास के गांवों के श्रद्धालु उपस्थित थे।

वृक्षोंमें फल परोपकार की निशानी

श्रीचंद्रप्रभुदिगंबर जैन मंदिर में चल रही धर्मसभा में क्षुल्लक नय सागर महाराज ने कहा कि मनुष्य को हमेशा परोपकारी बनना चाहिए। वृक्षों में फल परोपकार के लिए लगते है। कभी भी वृक्ष ने अपने फल का उपयोग स्वयं नहीं किया है। हम वृक्ष के पत्थर मारते है और वह हमें फल देता है। इसी तरह नदिया भी परोपकार के लिए बहती है और सभी को पानी पिलाती है, चाहे वह गरीब हो या अमीर। कोई भेदभाव नहीं करती है। जैन समाज के पारसमल, निरंजन जैन ने बताया कि मंगलाचरण महिला एवं बालिका मंडल ने प्रस्तुत किया।

पीपलू. बगड़ीगांव में भागवत एवं गो रक्षा महायज्ञ धार्मिक अनुष्ठान में कथा सुनते श्रद्धालु।