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संस्कारों की दे शिक्षा

7 वर्ष पहले
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आचार्यबद्रीनारायण शास्त्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति संस्कारित जीवन जिएं तथा भावी पीढ़ी को संस्कारों से पोषित करें। भगवान राम उनके भाईयों में धर्म के संस्कार थे, तभी तो उनमें कभी दुराग्रह के भाव उत्पन्न नहीं हुए, बल्कि सदैव एक दूसरे के प्रति अपार प्रेम, श्रद्धा समर्पण के भाव रखते थे।

उन्होंने यह विचार डंूसरी ग्राम में चल रहे भागवत ज्ञान समारोह में सोमवार को व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में धर्म के संस्कार होने के कारण ही आज भाई भाई में, बाप बेटे में, सास बहु में, देवर भाभी में विवाद बढ़ रहे है। अच्छे संस्कारों के पोषण से ही राष्ट्र परिवार में बढ रहे कलह शांत हो सकेंगे। कथा का विश्राम आरती एवं प्रसादी वितरण पर हुआ। इस मौके काफी संख्या में महिला पुरुष श्रद्धालु उपस्थित थे।