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फुलेरा रेलवे स्टेशन पर शवों की नुमाइश

7 वर्ष पहले
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फुलेरारेलवे स्टेशन पर मोर्चरी नहीं होने से खुले में शवों को रखना पड़ता है। यहां शव शिनाख्त के लिए रखने का ढंग आज भी पुराना ही चल रहा है। जीआरपी शिनाख्त के लिए शवों को प्रतीक्षालय के बाहर पुलिया के नीचे ही रखती है, जिससे कई बार तो क्षत-विक्षत शवों को देखकर यात्रियों को उबकाई जाती है और कई लोग तो उल्टियां तक कर देते हैं। ज्यादा परेशानी तो इन शवों को देखने से महिलाओं और बच्चों को होती है।शवों सेे उठने वाली दुर्गंध से प्रतीक्षालय में भी यात्री नहीं बैठ पाते। रात में तो शव रखे होने की स्थिति में वहां से कोई गुजरना तक पसंद नहीं करता। वैसे भी शव से उठने वाली दुर्गंध के कारण यहां से गुजरने वाले यात्रियों को या तो रुमाल या अन्य कपड़ा नाक पर रख कर निकलना पड़ता है।

अस्पतालऔर सीएचसी में भी नहीं मोर्चरी

रेलवेस्टेशन के पास रेलवे अस्पताल बना हुआ है। वहीं फुलेरा में सीएचसी भी है, लेकिन यहां पर दोनों ही अस्पतालों में मुर्दाघर नहीं बना हुआ है, जबकि कस्बे की आबादी करीब 45 हजार है और यहां पर दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या भी कम नहीं है। रेलवे स्टेशन के ही हादसों का ही आंकड़ा देखें तो इस वर्ष जनवरी से 13 सितंबर तक करीब 77 शव रेलवे पुलिया के नीचे जीआरपी शिनाख्त के लिए रख चुकी है।

सांभरलेक की मोर्चरी में कई बार रखवाया जाता है शव

कस्बे की सीएचसी के पास भी मोर्चरी नहीं होने से कई बार सीएचसी में आने वाले शवों को शिनाख्त के लिए कस्बे से 7 किलोमीटर दूर सांभरलेक ले जाकर मोर्चरी में रखवाया जाता है।

श्मशानमें खुले में करना पड़ता है पोस्टमार्टम : रेलवेऔर सीएचसी के पास मोर्चरी नहीं होने से शव का पोस्टमार्टम श्मशान भूमि में ले जाकर खुले में करना पड़ रहा है।

संक्रमितबीमारियां होने का खतरा : फुलेराके सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक धनराज बागड़ी ने बताया कि खुले में शव रखने से संक्रमित बीमारियां फैल सकती हैं।

मुर्दाघरहोना मजबूरी : जीआरपीथाना प्रभारी प्रेमचन्द कुमावत ने बताया कि मोर्चरी के अभाव में शव रेलवे स्टेशन पर खुले में रखने पड़ते हैं। मोर्चरी बनवाने के लिए तथा शवों को खुले में रखने की परेशानी के बारे में कई बार उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

कलेक्टरसरकार को अवगत कराया : फुलेराविधायक निर्मल कुमावत ने बताया कि उन्होंने