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ट्रेनों के कम ठहरने से फुलेरा स्टेशन वीरान

7 वर्ष पहले
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^उपचुनावहोने के बाद जल्द से जल्द रेल मंत्री से मिलकर कस्बे की रेल समस्याओं का निराकरण कराया जाएगा। निर्मलकुमावत, िवधायक

ग्रेडहोना प्रस्तावित

^फुलेरास्टेशन डी ग्रेड से ग्रेड में होना प्रस्तावित है। ग्रेड में होने के बाद रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का वाणिज्यिक ठहराव हो जाएगा बहुत सी अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। सतीशकुमार, रेलवेस्टेशन अधीक्षक

भास्कर न्यूज | फुलेरा

ब्रिटिशकाल में बने फुलेरा रेलवे स्टेशन का दायरा अब सिमटता नजर रहा है। व्यापारिक गोदाम बंद होने से व्यापारिक दृष्टि से भी स्टेशन सूना ही नजर आने लगा है।

इस रेलवे स्टेशन की स्थापना ब्रिटिशकाल में 1908 में हुई थी। उस समय रेलवे के डीजल शेड, लोको शेड, रेलवे यार्ड, कैरिज शेड आदि कल कारखाने स्थापित थे। इससे स्टेशन पर रेलवे कर्मचारियों की आवाजाही बनी रहती थी। इनके बंद हो जाने के बाद धीरे-धीरे यहां का रेलवे कारोबार सिमटता गया। वर्ष 1990 के बाद मीटर गेज को ब्रॉडगेज में बदलने के बाद इस रेलवे स्टेशन की पहचान धीरे-धीरे सिमटने लगी, जबकि यहां पर रेलवे का मीटर गेज का सबसे बड़ा यार्ड था। भाप से चलने वाले इंजनों के रख-रखाव के लिए लोको शेड मीटर गेज के डीजल रिपेयर के लिए डीजल शेड डिब्बों के रख-रखाव के लिए कैरिज शेड बना हुआ था। यहां हजारों रेल कर्मचारी कार्य करते थे। स्टेशन पर करीब-करीब सभी गाडिय़ों का ठहराव होता था, लेकिन ब्रॉडगेज में बदलने के बाद बहुत सी ट्रेनों का ठहराव बंद होता गया। वर्तमान में स्टेशन पर संचालित कुल अपडाउन 144 ट्रेनों में से केवल 49 का ही ठहराव है। पहले 80 ट्रेनें संचालित थीं, इन सभी का ठहराव था। इसके अलावा 50 मालगाड़ी संचालित हैं, लेकिन कई एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव नहीं होने से लोगों की चहल-पहल खत्म सी हो गई और सन्नाटा सा छाया रहता है। इस आमान परिवर्तन के बाद कस्बे के व्यापारियों के कारोबार पर भी इसका असर पड़ा है। अधिकतर व्यापारी रेलवे के कर्मचारियों पर आश्रित थे। इसमें से बहुत से व्यापारी अपना कारोबार समेट कर जयपुर पलायन कर गए।

स्टेशन अधीक्षक सतीश कुमार ने बताया कि आय कम होने से व्यापारिक गोदाम को यहां से बंद कर जयपुर चालू कर दिया गया। इससे व्यापारियों का आना-जाना कम हो गया। वर्तमान में स्टेशन पर करीब 1 लाख 70 हजार रुपए की आय होती है।

बढ़सकती है आय है : स्टेशनपर यदि अन्य एक्सप्रेस ट्रेनों