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गिरते जलस्तर पर जताई चिंता

6 वर्ष पहले
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गिरतेभूजल पर चिंता बढ़ने लगी है। इसे बचाने के लिए इंजीनियरों को भी जोड़ा जा रहा है। इसके लिए आबूसर के कृषि विज्ञान केंद्र में पांच दिवसीय कार्यशाला हुई। केंद्रीय भूजल बोर्ड पश्चिमी क्षेत्र डब्लूएसएसओ के सौजन्य से हुई कार्यशाला में कई भूजल वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं।

कार्यशाला के तीसरे दिन बुधवार को भूजल विभाग सीकर से आए राजेश पारीक ने बताया कि वाटर कंजर्वेशन दूरगामी सतत प्रक्रिया है। अरसे बाद इसके परिणाम सामने आते हैं। इसके लिए पानी का ही मैनेजमेंट पर्याप्त नहीं है। वरन पानी का उपभोग करने वाले लोगों की सोच को भी बदलना होता है। विभाग के एक्सईएन महेंद्र सिंह ने पानी के मितव्ययता से उपयोग पर जानकारी दी।

इससे पहले केंद्रीय भूजल बोर्ड के साइंटिस्ट वसीम अहमद ने प्रदेश जिले में पानी की स्थिति पर प्रकाश डाला। केवीके के प्रो. दयानंद ने कृषि में पानी का उचित उपयोग एवं भूजल संरक्षण की जानकारी दी। साइंटिस्ट विपिन मिश्रा ने भूजल साइकल के बारे में बताया। कार्यशाला में ग्राउंड वाटर क्वालिटी और समस्या, ग्राउंड वाटर का मूवमेंट, हाइड्रो-जियोमाफ्रोलाजीकल मेपिंग, मॉनिटरिंग, पंपिंग टेस्ट एवं डायमीटर डग वेल, ड्रिलिंग टेक्निक, रेनवाटर हार्वेस्टिंग एवं आर्टिफिशियल रिचार्ज मैथड, कम्यूनिटी पार्टिशिपेशन आदि पर भी विशेषज्ञों ने अपने विचार रखें। कार्यशाला में डब्लूएसएसओ के स्टेट कंसलटेंट डॉ. सुनीत सेठी, जलदाय विभाग के टीए नागरमल जांगिड़, एईएन महेंद्र चेतीवाल, पिलानी के अरुण जांगिड़, उदयपुरवाटी के प्रवीण वर्मा, डीएसयू कंसल्टेंट भूजल विभाग के अधिकारी भाग ले रहे हैं।

झुंझुनूं. आबूसर स्थित केवीके में भू-जल विषयक कार्यशाला में बोलते विशेषज्ञ।