झुंझुनूं. सूरजगढ़ ने अपने श्रवण कुमार को फिर से विधायक बना दिया। भरतपुर के कुम्हेर में दिसंबर में चुनाव हारे डॉ. दिगंबरसिंह को उपचुनाव में यहां की जनता ने भी नहीं स्वीकारा।
क्षेत्र में शुरू से स्थानीय नेता मुद्दा बना था और यही भाजना को लिए नुकसान वाला साबित हुआ। घरड़ू की ढाणी के श्रवण कुमार ने 3270 वोटों से जीत दर्ज की। वे पांचवीं बार विधायक बने हैं।
भाजपा ने वरिष्ठ नेता एवं वसुंधरा राजे के करीबी माने जाने वाले डॉ. दिगंबरसिंह को प्रत्याशी बनाया था। कांग्रेस के श्रवणकुमार एवं निर्दलीय नीता यादव का प्रचार अभियान बाहरी बनाम स्थानीय के इर्द-गिर्द ही रहा। जनता ने भी अपने जनादेश में स्थानीय की तवज्जो दी।
डॉ. दिगंबर के क्षत्रपों की ग्राउंड वर्किंग काम नहीं आई
वसुंधराराजे: मुख्यमंत्रीके करीबी होने के कारण ही डॉ. दिगंबर यहां से टिकट ले सके। विश्वासपात्र राजेंद्र राठौड़ को जिम्मा सौंपने के बावजूद वे भी लगातार चुनाव पर नजर रखे हुए थीं। 10 सितंबर को सभा की। सभा में जीते तो दिगंबर को मंत्री बनाने का दांव भी खेला।
राजेंद्र सिंह राठौड़ : 26 सितंबर रात में डॉ. दिगंबरसिंह की टिकट तय हुई। उसके पहले ही चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्रसिंह सूरजगढ़ पहुंच चुके थे। तब से मतदान वाले दिन 13 दिसंबर तक लगातार गांवों में घूमे। कॉल सेंटर भी चलाया। मतदाताओं से उनकी कोर टीम लगातार फोन पर भी संपर्क करती रही। पूरा प्रचार प्रबंधन उन्हीं के जिम्मे था।
संतोष अहलावत : उन्हीं के सांसद बनने से यह सीट खाली हुई थी। पहले पैनल में पति सुरेंद्र अहलावत का नाम था। डॉ. दिगंबर के नामांकन के साथ ही लगातार क्षेत्र में जनसंपर्क सभाएं की। स्थानीय होने के कारण कार्यकर्ताओं की गांवों में प्रचार की कमान संभाले रहीं।
सुंदरलाल: पहले सूरजगढ़ क्षेत्र के चुनाव जीतते रहे। वर्तमान में पिलानी से विधायक सुंदरलाल लगातार गांव-गांव गए। सीधे लोगों से संवाद कराया। क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ की मुख्यमंत्री वसुंधराराजे ने भी सराहना की थी।
नतीजे पर एक नजर
जीते: श्रवणकुमार (कांग्रेस)
वोट मिले : 70527
निकटतम प्रतिद्वंद्वी : डॉ. दिगंबरसिंह (भाजपा)
वोट मिले : 67257
जीत का अंतर : 3270
कुल मतदाता 234271
वोट पड़े थे : 163785
तीसरे स्थान पर : नीता यादव (निर्दलीय)
वोट मिले : 20979
कुल प्रत्याशी थे : 09