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अद्वितीय ग्रंथ है श्रीमद भागवत पुराण- आचार्य
स्थानीय मारुतिनंदन सेवा सदन में चल रहे भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के तीसरे दिन कथावाचक आचार्य गोविंद भैया ने जड़ भरत चरित्र प्रहलाद चरित्र के प्रसंगों पर विस्तार से वर्णन करते हुए भागवत पुराण के दौरान इन प्रसंगों के महत्व को विस्तार से बताया। भागवत कथामृत का श्रवण पान करने के लिए आसपास के गांवों से भी अनेक भक्त पोकरण आए हैं।
प्रसिद्ध आचार्य गोविंद ने कहा कि तप करने से, अन्नदान करने से, गृहस्थ धर्म की पालना करने से, जल की एवं सूर्य की उपासना करने से भी ज्ञान प्राप्त नहीं होता। उन्होंने कहा कि ज्ञान की प्राप्ति महा पुरूषों की आराधना से ही हो सकती है। उन्होंने कहा कि जब तक भीतर का ज्ञान नहीं जगेगा तब तक साधना की प्राप्ति नहीं हो सकती। आचार्य ने कहा कि मन को वश में किए बिना ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती। श्रीमद् भगवत गीता को विश्व का अद्वितीय ग्रंथ बताते हुए आचार्य ने कहा कि जिसका कर्म व्यवस्थित हो जाएगा उसका जीवन धन्य होगा। जड़ भरत का उदाहरण देते हुए आचार्य ने कहा कि सभी सुखों का परित्याग कर जंगल में की गई साधना से ही वे अमर हो गए। कथा में उपस्थित भक्तों को आगाह करते हुए कहा कि जिस मार्ग पर ज्ञानीजन, संत महापुरुष एवं ज्ञाता चलते हैं उसी मार्ग पर चलने से मनुष्य का कल्याण अवश्यंभावी है। आचार्य गोविंद भैया श्रृष्टि के अलग अलग खंडों का वर्णन करते हुए कहा कि देवताओं की कर्मभूमि होने के कारण भारत को सर्वश्रेष्ठ खण्ड माना गया है। तीनों वृत्तियों का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक वृत्ति के लोगों की वृत्ति सात्विक धर्म एवं अधर्म कर्म करने वाले लोग राजसीवृति के तथा केवल अधार्मिक कर्म करने वाले लोग तामसी वृत्ति के होते है तथा यह वर्ती मनुष्य के विनाश का कारण बनती है।
पोकरण. श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह में उपस्थित श्रद्धालु और भागवत कथा के दौरान प्रवचन देते आचार्य