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रोजमर्रा के कार्यों में करें हिंदी का उपयोग

7 वर्ष पहले
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राष्ट्रके पतन का कारण संस्कृति और भाषा का हास हैं। पाठ्यक्रम के माध्यम से भी हिंदी भाषा नवीन अपभ्रंश के रूप में विकसित हो रही है। उक्त विचार वरिष्ठ साहित्यकार दीनदयाल ओझा ने जिला पुस्तकालय द्वारा आयोजित हिंदी दिवस के अवसर पर व्यक्त किए। शिक्षाविद् बालकृष्ण जगाणी ने कहा कि प्रत्येक हिंदी भाषी के दिल में दर्द है कि वह राजभाषा तो बनी मगर राष्ट्रभाषा नहीं बन पाई। आपने हिंदी को जनमानस की भाषा बनाने के लिए साहित्यकारों से पहल करने की आवश्यकता जताई। मांगीलाल सेवक ने हिंदी को समस्त प्रदेशों में आवश्यक रूप से लागू करने की अपील की।

शिक्षाविद् श्रीवल्लभ पुरोहित ने बताया कि हिंदी बहुसंख्यक लोगों की भाषा है। यह सरल, लचीली और सुगम है। उन्होंने सुखों का द्वार संतुलन है कविता पढ़ी। हास्य कवि गिरधर लाल भाटिया ने कहा कि भाषा स्ंवय नवीन शब्द गढती है। हिंदी भाषा अन्य भाषा के शब्दों को अपनाते हुए नवीन शब्दावली तैयार करती रहती है। तेलुगु भाषा के साहित्यकार मणिक्कम ने कहा कि भाषा ऐसी हो जो अन्य भाषाओं के शब्दों को ग्रहण कर सके।

वरिष्ठ व्याख्याता उगमदान चारण ने हिंदी साहित्य को अधिक से अधिक पढ़ने पर बल दिया। साहित्यकार हरिवल्लभ बोहरा ने कहा कि हिंदी को जनमानस की भाषा बनाने में गैर हिंदी भाषियों का भी बड़ा योगदान रहा है। व्यावसायिक अथवा सांस्कृतिक क्षेत्रों के हितों के कारण हिंदी भाषा का विरोध निरंतर होता रहा जिसके कारण यह भाषा राष्ट्रभाषा नहीं बन पाई। उन्होंने “अपनी हिन्दी भाषा विषयक कविता प्रस्तुत की। कवि नंदकिशोर दवे ने कहा कि कार्यालयों एवं जनमानस की भाषा हिंदी बने इसके लिए हमें प्रय| किए जाने चाहिए।

उन्होंंने कश्मीर के दर्द पर एक कविता पढ़ी। खिलूमल केवलिया ने कहा कि अहिंदी भाषियों को भी हिंदी सिखाने के अवसर प्रदान किए जाने चाहिए। युवा कवि आनंद जगाणी ने बताया कि हिंदी की स्वीकार्यता जन जन में बढ़े इसके लिए आवश्यक है कि प्रतिदिन के कार्यों में हिंदी का हम अधिक से अधिक प्रयोग करें।

युवा कवि नरेन्द्र वासु ने हिंदी भाषा के इतिहास पर चर्चा करते हुए राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित होने की बात कही। एक मुक्तक “लिखता हूं मैं उर्दू में और हिंदी में गाता हूं।” पढ़कर तालिया बटोरी। तरूण कवि रामचन्द्र लखारा ने कहा कि हिंदी पूर्ण वैज्ञानिक भाषा है। जिसमें उच्चारण क्षमता के आधार पर गेयता से