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गले की फांस बना विद्यालयों का एकीकरण

7 वर्ष पहले
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राज्य सरकार द्वारा किए गए विद्यालयों के एकीकरण में ग्राम पंचायत गोमट की स्कूल अभिभावकों बच्चों के लिए जी का जंजाल बन गई है। सरकार की शिक्षा नीति के तहत गांव की माध्यमिक विद्यालय में 3 प्राथमिक 1 उच्च प्राथमिक का विलय करने से अभिभावकों की परेशानी बढ़ गई है।

पूर्व सरपंच मंजूरदीन ने बताया कि गांव में अधिकांश लोग मजदूर वर्ग के हैं जो सुबह 8 बजे कार्य पर चले जाते हैं और विद्यालय 10 बजे खुलता है। वहीं विद्यालय की दूरी करीब डेढ़ से दो किलोमीटर पड़ती है। जिसके कारण बच्चों का पहुंचना दूभर हो गया है। अधिकांश बच्चे अपनी पुरानी स्कूलों के इर्द गीर्द घूम कर पुन: घर चले जाते हैं। जिससे एकीकरण आदर्श राजकीय माध्यमिक विद्यालय में छात्रों की उपस्थिति दिनों दिन कम होती जा रही है।

जहां एकीकरण होने के बाद आदर्श विद्यालय का नामांकन 1 से 8 तक का लगभग 500 हो गया था वहीं विद्यालय की दूरी के कारण उपस्थिति मात्र 150 के लगभग ही रह गया। एकीकरण से छात्रों का विद्यालय के प्रति रूझान कम होता जा रहा है। जिससे छात्रों की उपस्थिति 65 से 70 प्रतिशत तक कम हो गई है, जो शिक्षकों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।

उर्दूविषय बना मुसीबत

एकीकरणके तहत की गई 3 प्राथमिक विद्यालयों कालों का वास, उमरदीन की ढाणी, मेघवालों का वास में उर्दू विषय होने के कारण इन प्राथमिक विद्यालयों के छात्रों का विलय 1 से 5 की कक्षा में कर दिया गया। परन्तु इन कक्षाओं में पढऩे वाले कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों के लिए उर्दू पढऩा मुश्किल ही नहीं मुसीबत बन गया है। ऐसे में उन्हें उर्दू के कालांश में क्या करे समझ में नहीं रहा है।

राजस्थानशिक्षक संघ राष्ट्रीय की बैठक

पोकरण.राजस्थानशिक्षक संघ राष्ट्रीय के प्रदेश उपाध्यक्ष नत्थाराम रिणवा ने शनिवार को कार्यकर्ताओं की बैठक ली। बैठक में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे एकीकरण समानीकरण पर पुरजोर शब्दों से विरोध किया गया।

उन्होंने कहा कि एकीकरण 1 किलोमीटर के दायरे के अंतर्गत होना चाहिए, 30 विद्यार्थियों वाला विद्यालय का एकीकरण नहीं किया जाए, उच्च माध्यमिक विद्यालयों में व्याख्याता के पद कक्षानुरूप विषयानुरूप सृजित किए जाए। 120 विद्यार्थियों की पाबंदी को हटाया जाए।

उन्होंने बताया तक बैठक में राणीदानसिंह भूट्टो, अशोक कुमार खत्री, अशोक दाधीच, नारायणसिंह तंवर, चंदनसिंह राठौड़ ने भी