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मुक्ति के लिए करें कर्म के साथ भक्ति : मुरारी
शहरमें चल रही श्रीमद भागवत कथा का शोभा यात्रा के साथ भागवत कथा का समापन किया गया। पिछले सात दिनों तक चली भागवत कथा के दौरान सैकड़ों की सं या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर भावगत कथा सुनी। छंगाणियों की बगेची में चल रही भागवत कथा में सात दिनों तक भागवत कथा का आयोजन किया गया था वहां से शोभा यात्रा प्रारंभ हुई। अन्तिम दिन की कथा के समापन तथा भागवत पुरान की आरती के पश्चात प्रारंभ हुई शोभा यात्रा में शहर के लोगों के भाग लिया। भागवत कथा सप्ताह के समापन के अवसर पर आयोजित इस शोभा यात्रा के प्रति शहरवासियों में अपूर्व उत्साह देखने को मिला।
छगाणियों की बगेची में चल रही भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के अन्तिम दिन सैकड़ों श्रोताओं को प्रवचन देते हुए कृष्णा मुरारी ने कहा कि भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य के शरीर में ज्ञान की उत्पति होती है और ज्ञान प्राप्ति के पश्चात व्यक्ति में भक्ति एवं वैराग्य का जागरण होता है। प्रवचनों की अन्तिम कड़ी में उन्होंने ने कृष्ण उद्धव संवाद के माध्यम से ज्ञानकाण्ड का वर्णन करते हुए वर्णाश्रम धर्म, भिक्षु गीता आदि का वर्णन करते हुए जीवन की मुक्ति के सुगम मार्ग बताए। उन्होंने शुभ संस्कारों के तहत कर्म से भक्ति, भक्ति से ज्ञान की उत्पति द्वारा जीव की मुक्ती होने की बात कहीं। उन्होंने कहा कि जब तक व्यक्ति कर्म के साथ प्रतिदिन ईश्वर उपासना नहीं करता है तो उसे मुक्ति नहीं मिल सकती। उन्होंने कहा कि भगवान का ध्यान लगाने से जीव संसारिक सुखो को प्राप्त करते हुए ईश्वरीय कृपा से भक्ति के मार्ग से मुक्ति को प्राप्त करता है। संत ने उपस्थित जनसमुह से अपने व्यवहार से सबका मन शीतल करने का आह्वान किया। उन्होंने भागवत कथा का सार संक्षिप्त में बताते हुए कहा कि वैसे तो व्यक्ति को नियमित रूप से भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। मगर यदि कोई लगातार सात दिनों तक भागवत कथा नहीं सुन सके तो कथा के अन्तिम दिन १२ स्कन्धों का सार सुनता है उसे भी पूरे भागवत कथा का फल मिलता है। कथा के अन्तिम दिन संत ने भगवान कृष्ण द्वारा शिशुपाल का उद्धार, बलराम का समुन्द्र गमन, भगवान कृष्ण का परलोक गमन का वर्णन किया।
पोकरण. भागवत कथा के अंतिम दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।