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भामाशाह आधार कार्ड बनवाने में बीत रहा है दिन
कार्ड बनवाने के लिए उमड़ रही है लोगों की भीड़
चैनपुरानिवासी गृहणी राजश्री बुधवार को सुबह अपने वार्ड में लगे शिविर में भामाशाह आधार कार्ड बनवाने गई। करीब 11 बजे शिविर स्थल पहुंची और उसके दोनों कार्ड की कार्रवाई में चार घंटे का समय लग गया। यह केवल राजश्री की नहीं बल्कि इन दिनों शहर ग्रामीण क्षेत्रों में लग रहे शिविरों में सभी वार्डवासियों की कहानी है।
शिविर स्थल पर निर्धारित संख्या में तो उपकरण लगे हैं और ही कार्मिक मौजूद रहते हैं। और तो और इन कार्मिकों पर मॉनिटरिंग करने के लिए अधिकारी भी नजर नहीं रहे हैं। गौरतलब है कि इन दिनों जिले भर में अलग अलग वार्डों में भामाशाह शिविर आयोजित हो रहे हैं। जिसमें भामाशाह कार्ड के साथ-साथ आधार कार्ड भी बन रहे हैं। लेकिन इन शिविरों में सुचारू काम होता नजर नहीं रहा है। हालांकि लोगों के कार्ड बन रहे हैं वह केवल उनके जिनके पास समय धैर्य हो।
कार्रवाईमें लगता है समय
सबसेपहले शिविर स्थल से भामाशाह आधार कार्ड के फार्म लेने पड़ते हैं। उसके बाद इन फार्मों को भरने के बाद उसके साथ आवश्यक दस्तावेज संलग्न करने पड़ते हैं। मौके पर बैठे नगरपरिषद के जेईएन एइएन इन आवेदनों की जांच करते हैं। जांच में इन अधिकारियों द्वारा काफी समय लगाया जा रहा है। वहीं उसके बाद पहले आधार कार्ड के लिए फोटो खींचवाना पड़ता है और बाद में भामाशाह कार्ड के लिए। यह कार्रवाई इतनी लम्बी हो जाती है कि तीन से चार घंटे का समय लग जाता है।
कार्मिककरते हैं मनमानी
शहरवासियोंके अनुसार जहां जहां भी शिविर लगे हैं वहां उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। ठेकेदार के कार्मिक कार्ड बनवाने की कार्रवाई में अपनी मनमर्जी चलाते हैं जिसका लोगों द्वारा विरोध भी किया जाता है लेकिन कोई भी अधिकारी इनकी मॉनिटरिंग नहीं कर रहा है।
आबादीज्यादा, उपकरण कार्मिक कम
शहरीक्षेत्र में लगाए जा रहे इन शिविरों में उपकरणों कार्मिकों की उपस्थिति कम रहती है। वहीं सभी वार्डों में 3 से 4 हजार की आबादी है। ऐसे में तीन दिन लगने वाले शिविरों में सभी वार्डवासियों के कार्ड नहीं बन पा रहे हैं और उसके बाद वार्डवासी कार्ड बनवाने के लिए अन्य शिविरों में भटकते रहते हैं।
^हमारेवार्ड में लगे शिविर में छह कम्प्यूटर लगाए गए जिनमें से चार खराब हो गए और वार्डवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। राज्य सरकार की महत्वाक