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कर्म करता है उसी के अनुरूप उसे मृत्यु मिलती है : मुरारी

7 वर्ष पहले
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स्थानीयछंगाणियों की बगेची में चल रहे श्रीमद् भागवत महापुराण के दूसरे दिन प्रवचन सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।

कथावाचक कृष्ण मुरारी बोहरा द्वारा भागवत पुराण पर दिये जा रहे प्रवचनों को सुनने के प्रति जनता में अपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। भागवत कथा के दूसरे दिन परीक्षित जन्म, सुखदेव का आगमन, विदुर चरित्र, वाराह अवतार चरित्र के विस्तार पूर्वक वर्णन में संगीतमय प्रवचनों के दौरान ऐसे भी क्षण आते है जब श्रोता गण झूमने को मजबूर हो जाते है। महाराज ने कहा कि जब तकजीव माता के गर्भ में रहता है तब तक वह बाहर निकलने के लिये छट पटाता रहता है। उस समय वह जीव बाहर निकलने के लिए ईश्वर से अनेक प्रकार के वादे करता है। मगर जन्म लेने के पश्चात सांसारिक मोह माया में फं कर वह भगवान से किए गए वादों को भूल जाता है। जिसके परिणाम स्वरूप उसे चौरासी लाख यौनी भोगनी पड़ती है।

महाराज ने कहा कि व्यक्ति अपने जीवन में जिस प्रकार के कर्म करता है उसी के अनुरूप उसे मृत्यु मिलती है। भगवान धु्रव के सत्कर्मों की चर्चा करते हुए उन्होने कहॉ कि ध्रुव की साधना, उनके सत्कर्म तथा ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा के परिणाम स्वरूप ही उन्हे वेकुंठ लोक प्राप्त हुआ। उन्होने जहां कि प्राणी मात्र की इच्छा होती है कि वह सदैव सुखी रहे मगर बिना धर्म के व्यक्ति कभी सुख को प्राप्त नहीं कर सकता।

पोकरण. भागवत कथा में प्रवचन देते कथावाचक कृष्ण मुरारी