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भागवत मन को पवित्र करने का एकमात्र उपाय : बोहरा

7 वर्ष पहले
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स्थानीयछंगाणियों की बगेची में मुख्य यजमान घनश्याम ओमप्रकाश छंगाणी द्वारा आयोजित श्रीमदभागवत कथा सप्ताह के तीसरे दिन कथा वाचक कृष्ण मुरारी बोहरा ने आचार्य पंडित अजय व्यास के सान्निध्य में स्थापित देवताओं की वैदिक मंत्रोचारण के साथ पूजा अर्चना कर कथा प्रारंभ की।

बोहरा ने तीसरे दिन कपिल चरित्र, सतीचरित्र, धु्रव चरित्र, नरसिंह अवतार, जड़ भरत चरित्र सहित अन्य प्रसंगों पर विस्तार श्रोताओं को भागवत पुराण का वर्णन किया। कथावाचक कृष्ण मुरारी ने कहा कि भागवत श्रवण मन को पवित्र करने का एक मात्र उपाय है। उन्होंने कहा कि लाखों पुण्यों के बाद ही व्यक्ति के मन में भागवत कथा सुनने की इच्छा जागृत होती है। उन्होंने भागवत कथा को अमृत से भी दुर्लभ बताते हुए कहा कि श्रीमद् भागवत महापुराण हमारी उन सभी समस्या का समाधान करता है जिसमें फंस कर जीव अपने आप को असहाय अनुभव करता है उन्होंने कहा कि जिस फल की प्राप्ति तपस्या एवं समाधि से भी नहीं मिलती वही फल कलयुग में भगवान के कीर्तन से प्राप्त हो जाता है। बोहरा ने कहा की कलयुग में कथा तो घर-घर में हो रही है मगर उसका सार दिनोंदिन कम हो रहा है। उन्होंने भागवत पर प्रकाश डालते हुए कहा की भागवत भगवान श्रीकृष्ण का रूप है जिसमें तीन स्वरूप मिलकर एक होते है जैसे सत, चित तथा आनन्द भागवत कथा श्रवण से ही प्राप्त होता है।

उन्होंने उपस्थित भक्त गणों से कहा कि तीन चीजें कभी भी पुरानी नहीं होती जिसमे पहली भागवत कथा, दूसरा स्वयं भगवान तथा तीसरा उसका भक्त यह हमेशा नवीन रहते है इनके आगे कभी भी पूर्व नहीं लग सकता। इसलिए भागवत कथा श्रवण कर के अपने जीवन को हमेशा नवीन रखें।

पोकरण. छंगाणियों की बगेची में चल रही भागवत कथा में उपस्थित श्रद्धालु