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नशा मुक्ति शिविर में पेयजल, भोजन

6 वर्ष पहले
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सेठविट्ठलदास राठी राजकीय अस्पताल में नशा मुक्ति शिविर के दौरान भर्ती मरीजों को पर्याप्त सुविधा नहीं मिल रही है। साथ चिकित्सकों की अनदेखी के कारण मरीजों का शिविर में बैठना मुश्किल हो गया है। राज्य सरकार ने इन दिनों नशेडियों का नशा छुड़वाने के लिए शिविर शुरू किया है। शिविर के प्रथम दिन 35 नशेड़ियों को मनोचिकित्सक डॉ. वीरेन्द्र शर्मा ने भर्ती किया। भर्ती करने के साथ ही वे जयपुर चले गए। डाक्टर के अभाव में मरीजों बेहाल हैं। कई मरीज शिविर को छोड़ कर भाग गए हैं। दूसरे दिन शिविर में मात्र 23 नशेड़ी ही बचे। तीसरे दिन भी संख्या घट कर मात्र 19 ही रह गई है।

पानीभी बाहर से खरीदना पड़ता है

शिविरमें नशेड़ियों ने बताया कि शिविर में तो खाने के लिए पर्याप्त भोजन दिया जा रहा है और ही पीने को पानी। ऐसे में उन्हें बाजार से पानी खरीदकर लाना पड़ रहा है। अस्पताल में जिस कक्ष में उन्हें भर्ती किया गया है वहां पर नहाने के लिए भी पानी नहीं है। वे पिछले तीन दिनों से बिना नहाए वहां पर बैठे इलाज करवा रहे हैं। शिविर कक्ष के चारों ओर फैली गंदगी तथा बिखरे गंदे पानी के कारण उनका कक्ष में बैठना मुश्किल हो गया है। सफाई की व्यवस्था नहीं होने के कारण बैठना भी दुश्वार हो गया है।

चिकित्सकनहीं होने से परेशान हैं नशेड़ी

पिछलेतीन दिनों से नशा मुक्ति शिविर में चिकित्सक नहीं है। ऐसे में सारा भार अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉ. मोहम्मद याकूब पर गया है। अस्पताल में मौसमी बीमारियों के मरीजों की उमड़ रही है। दूर-दूर से सर्दी जुकाम के मरीज अस्पताल में रहे हैं। ऐसे में नशेड़ियों का उपचार हो पाता है। नर्सिंग स्टाफ इन नशेड़ियों को संभालते हैं।

उपचारके अभाव में बिगड़ी तबीयत

शिविरमें पोकरण के वार्ड संख्या 7 निवासी तेजकरण मेघवाल की तीसरे दिन बुधवार को तबीयत बिगड़ गई। तेजकरण की पल्स रेट गिर गई। वह चक्कर खाकर गिर गया। नर्सिंग कर्मचारी मोटाराम भणियाणा ने डॉ. मोहम्मद याकूब को फोन कर दवाई के बारे में पूछा। डॉ. याकूब ने डॉ. धर्मेन्द्र सुथार को जांच के लिए भेजा। उससे पहले नर्सिंग स्टाफ ने भाटी दवाइयां दी। बाद में पहुंचे डॉ. धर्मेन्द्र सुथार ने सभी को सही देख नशेडियों पर बिफरे तथा उन्हें खरी खोटी सुनाई।

पोकरण. राजकीय अस्पताल में नशा मुक्ति शिविर में बैठे नशेड़ी।