अब महिलाएं चलाएंगी गांवों की सरकार
जिलेकी राजनीति में इस बार बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लगातार भाजपा मजबूत होती दिखाई दे रही थी कि पंचायती राज चुनावों में एकदम से पिछड़ गई। विधानसभा, लोकसभा और निकाय चुनावों में जबरदस्त जीत के बाद भाजपा पूरी तरह से पंचायती राज चुनावों में भी आश्वस्त नजर रही थी लेकिन भाजपा के अति विश्वास ने उसका सफाया कर दिया।
वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस के लिए ये चुनाव संजीवनी साबित हुए। कांग्रेस ने रणनीति से काम किया और हर चुनाव हारने के बाद पंचायती राज चुनावों में अपना दबदबा कायम रखा।
जैसलमेरमें भाजपा का आत्मसमर्पण
जैसलमेरविधानसभा क्षेत्र में भाजपा की सबसे बुरी स्थिति इस बार देखने को मिली। इतनी बुरी स्थिति तो कांग्रेस की सरकार के समय में भी नहीं हुई थी। ऐसा लगने लगा कि जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र में तो भाजपा ने आत्मसमर्पण कर दिया था। टिकट वितरण, चुनाव प्रचार से लेकर प्रमुख प्रधान के चुनावों में भाजपा नतमस्तक नजर आई। इस वजह से प्रमुख दो प्रधान, उपप्रधान कांग्रेस निर्विरोध बनाने में कामयाब हो गई।
पोकरणमें भाजपा ने किया संघर्ष
जैसलमेरमें जहां आत्मसमर्पण की स्थिति देखने को मिली वहीं पोकरण में भाजपा संघर्ष करती नजर आई। पोकरण के इतिहास में भाजपा का इस बार का सबसे अच्छा प्रदर्शन देखने को मिला। पंचायत समिति सांकड़ा परंपरागत रूप से कांग्रेस के खाते में रही है वहीं इस बार भाजपा ने वहां कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी।
इसके अलावा गत बार जिला परिषद की पोकरण क्षेत्र की 8 सीटों में से भाजपा के पास दो सीटें थी जो इस बार तीन हो गई। जिले में भाजपा को जो नुकसान हुआ है वह जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र में ही हुआ है।
पंचायत समिति सांकड़ा में 1995 में भाजपा के पास 6 और कांग्रेस के पास 10 सीटें थी। वहीं 2000 में भाजपा के पास 4 और कांग्रेस के पास 12, 2005 में भाजपा के पास केवल 2 और कांग्रेस के पास 14 और 2010 में भाजपा के पास 8 और कांग्रेस के पास 10 सीटें थी। इस हिसाब से इस बार भाजपा का प्रदर्शन पोकरण में बेहतर रहा है।
कांग्रेसके लिए संजीवनी
पंचायतीराज चुनाव कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हुए। पिछले चुनावों में लगातार हार का सामना करने के बाद पंचायती राज चुनावों में कांग्रेस की जबरदस्त जीत ने उसे उत्साहित कर दिया है। यहां तक कि भाजपा की परंपरागत पंचायत समिति सम भी कांग्रेस ने इस बार छीन ली है। कांग्रेस इन चुनावों में पूरी तरह से भाजपा पर भारी पड़ती नजर आई। इससे भाजपा की चिंता बढ़ सी गई है।
कांग्रेससंगठन के नए मायने
कांग्रेससंगठन अब तक गाजी फकीर परिवार के अनुसार ही चलता आया है। लेकिन इस बार कांग्रेस संगठन में नया मजबूत गठजोड़ होता हुआ दिखाई दिया। प्रदेश सचिव रूपाराम धणदै ने फकीर परिवार के साथ मिलकर जैसलमेर जिले से भाजपा का सफाया कर दिया। मुस्लिम मेघवाल गठबंधन जैसलमेर की राजनीति में आगामी कई वर्षो तक बरकरार रहने की संभावनाएं भी जताई जा रही है, जिससे निश्चित तौर पर कांग्रेस मजबूत रहेगी।
राजपूतोंका कांग्रेस के साथ होना भाजपा की िचंता
इसबार पंचायती राज चुनावों में मुस्लिम मेघवाल का मजबूत गठबंधन हुआ वहीं राजपूत वर्ग भी कांग्रेस के पक्ष में रहा। परंपरागत रूप से भाजपा का माना जाने वाला राजपूत वर्ग यदि कांग्रेस से जुड़ता है तो भविष्य की राजनीति में भाजपा के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय हो सकता है। इससे चितंत होकर भाजपा के पदाधिकारी गहन मंथन में लग गए है कि आखिर भाजपा की लहर कहां खो गई।
विमल शर्मा | जैसलमेर
जिलेकी राजनीति में इस बार बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लगातार भाजपा मजबूत होती दिखाई दे रही थी कि पंचायती राज चुनावों में एकदम से पिछड़ गई। विधानसभा, लोकसभा और निकाय चुनावों में जबरदस्त जीत के बाद भाजपा पूरी तरह से पंचायती राज चुनावों में भी आश्वस्त नजर रही थी लेकिन भाजपा के अति विश्वास ने उसका सफाया कर दिया।
वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस के लिए ये चुनाव संजीवनी साबित हुए। कांग्रेस ने रणनीति से काम किया और हर चुनाव हारने के बाद पंचायती राज चुनावों में अपना दबदबा कायम रखा।
जैसलमेरमें भाजपा का आत्मसमर्पण
जैसलमेरविधानसभा क्षेत्र में भाजपा की सबसे बुरी स्थिति इस बार देखने को मिली। इतनी बुरी स्थिति तो कांग्रेस की सरकार के समय में भी नहीं हुई थी। ऐसा लगने लगा कि जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र में तो भाजपा ने आत्मसमर्पण कर दिया था। टिकट वितरण, चुनाव प्रचार से लेकर प्रमुख प्रधान के चुनावों में भाजपा नतमस्तक नजर आई। इस वजह से प्रमुख दो प्रधान, उपप्रधान कांग्रेस निर्विरोध बनाने में कामयाब हो गई।
पोकरणमें भाजपा ने किया संघर्ष
जैसलमेरमें जहां आत्मसमर्पण की स्थिति देखने को मिली वहीं पोकरण में भाजपा संघर्ष करती नजर आई। पोकरण के इतिहास में भाजपा का इस बार का सबसे अच्छा प्रदर्शन देखने को मिला। पंचायत समिति सांकड़ा परंपरागत रूप से कांग्रेस के खाते में रही है वहीं इस बार भाजपा ने वहां कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी।
इसके अलावा गत बार जिला परिषद की पोकरण क्षेत्र की 8 सीटों में से भाजपा के पास दो सीटें थी जो इस बार तीन हो गई। जिले में भाजपा को जो नुकसान हुआ है वह जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र में ही हुआ है।
पंचायत समिति सांकड़ा में 1995 में भाजपा के पास 6 और कांग्रेस के पास 10 सीटें थी। वहीं 2000 में भाजपा के पास 4 और कांग्रेस के पास 12, 2005 में भाजपा के पास केवल 2 और कांग्रेस के पास 14 और 2010 में भाजपा के पास 8 और कांग्रेस के पास 10 सीटें थी। इस हिसाब से इस बार भाजपा का प्रदर्शन पोकरण में बेहतर रहा है।
कांग्रेसके लिए संजीवनी
पंचायतीराज चुनाव कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हुए। पिछले चुनावों में लगातार हार का सामना करने के बाद पंचायती राज चुनावों में कांग्रेस की जबरदस्त जीत ने उसे उत्साहित कर दिया है। यहां तक कि भाजपा की परंपरागत पंचायत समिति सम भी कांग्रेस ने इस बार छीन ली है। कांग्रेस इन चुनावों में पूरी तरह से भाजपा पर भारी पड़ती नजर आई। इससे भाजपा की चिंता बढ़ सी गई है।
कांग्रेससंगठन के नए मायने
कांग्रेससंगठन अब तक गाजी फकीर परिवार के अनुसार ही चलता आया है। लेकिन इस बार कांग्रेस संगठन में नया मजबूत गठजोड़ होता हुआ दिखाई दिया। प्रदेश सचिव रूपाराम धणदै ने फकीर परिवार के साथ मिलकर जैसलमेर जिले से भाजपा का सफाया कर दिया। मुस्लिम मेघवाल गठबंधन जैसलमेर की राजनीति में आगामी कई वर्षो तक बरकरार रहने की संभावनाएं भी जताई जा रही है, जिससे निश्चित तौर पर कांग्रेस मजबूत रहेगी।
राजपूतोंका कांग्रेस के साथ होना भाजपा की िचंता
इसबार पंचायती राज चुनावों में मुस्लिम मेघवाल का मजबूत गठबंधन हुआ वहीं राजपूत वर्ग भी कांग्रेस के पक्ष में रहा। परंपरागत रूप से भाजपा का माना जाने वाला राजपूत वर्ग यदि कांग्रेस से जुड़ता है तो भविष्य की राजनीति में भाजपा के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय हो सकता है। इससे चितंत होकर भाजपा के पदाधिकारी गहन मंथन में लग गए है कि आखिर भाजपा की लहर कहां खो गई।
विमल शर्मा | जैसलमेर
जिलेकी राजनीति में इस बार बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लगातार भाजपा मजबूत होती दिखाई दे रही थी कि पंचायती राज चुनावों में एकदम से पिछड़ गई। विधानसभा, लोकसभा और निकाय चुनावों में जबरदस्त जीत के बाद भाजपा पूरी तरह से पंचायती राज चुनावों में भी आश्वस्त नजर रही थी लेकिन भाजपा के अति विश्वास ने उसका सफाया कर दिया।
वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस के लिए ये चुनाव संजीवनी साबित हुए। कांग्रेस ने रणनीति से काम किया और हर चुनाव हारने के बाद पंचायती राज चुनावों में अपना दबदबा कायम रखा।
जैसलमेरमें भाजपा का आत्मसमर्पण
जैसलमेरविधानसभा क्षेत्र में भाजपा की सबसे बुरी स्थिति इस बार देखने को मिली। इतनी बुरी स्थिति तो कांग्रेस की सरकार के समय में भी नहीं हुई थी। ऐसा लगने लगा कि जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र में तो भाजपा ने आत्मसमर्पण कर दिया था। टिकट वितरण, चुनाव प्रचार से लेकर प्रमुख प्रधान के चुनावों में भाजपा नतमस्तक नजर आई। इस वजह से प्रमुख दो प्रधान, उपप्रधान कांग्रेस निर्विरोध बनाने में कामयाब हो गई।
पोकरणमें भाजपा ने किया संघर्ष
जैसलमेरमें जहां आत्मसमर्पण की स्थिति देखने को मिली वहीं पोकरण में भाजपा संघर्ष करती नजर आई। पोकरण के इतिहास में भाजपा का इस बार का सबसे अच्छा प्रदर्शन देखने को मिला। पंचायत समिति सांकड़ा परंपरागत रूप से कांग्रेस के खाते में रही है वहीं इस बार भाजपा ने वहां कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी।
इसके अलावा गत बार जिला परिषद की पोकरण क्षेत्र की 8 सीटों में से भाजपा के पास दो सीटें थी जो इस बार तीन हो गई। जिले में भाजपा को जो नुकसान हुआ है वह जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र में ही हुआ है।
पंचायत समिति सांकड़ा में 1995 में भाजपा के पास 6 और कांग्रेस के पास 10 सीटें थी। वहीं 2000 में भाजपा के पास 4 और कांग्रेस के पास 12, 2005 में भाजपा के पास केवल 2 और कांग्रेस के पास 14 और 2010 में भाजपा के पास 8 और कांग्रेस के पास 10 सीटें थी। इस हिसाब से इस बार भाजपा का प्रदर्शन पोकरण में बेहतर रहा है।
कांग्रेसके लिए संजीवनी
पंचायतीराज चुनाव कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हुए। पिछले चुनावों में लगातार हार का सामना करने के बाद पंचायती राज चुनावों में कांग्रेस की जबरदस्त जीत ने उसे उत्साहित कर दिया है। यहां तक कि भाजपा की परंपरागत पंचायत समिति सम भी कांग्रेस ने इस बार छीन ली है। कांग्रेस इन चुनावों में पूरी तरह से भाजपा पर भारी पड़ती नजर आई। इससे भाजपा की चिंता बढ़ सी गई है।
कांग्रेससंगठन के नए मायने
कांग्रेससंगठन अब तक गाजी फकीर परिवार के अनुसार ही चलता आया है। लेकिन इस बार कांग्रेस संगठन में नया मजबूत गठजोड़ होता हुआ दिखाई दिया। प्रदेश सचिव रूपाराम धणदै ने फकीर परिवार के साथ मिलकर जैसलमेर जिले से भाजपा का सफाया कर दिया। मुस्लिम मेघवाल गठबंधन जैसलमेर की राजनीति में आगामी कई वर्षो तक बरकरार रहने की संभावनाएं भी जताई जा रही है, जिससे निश्चित तौर पर कांग्रेस मजबूत रहेगी।
राजपूतोंका कांग्रेस के साथ होना भाजपा की िचंता
इसबार पंचायती राज चुनावों में मुस्लिम मेघवाल का मजबूत गठबंधन हुआ वहीं राजपूत वर्ग भी कांग्रेस के पक्ष में रहा। परंपरागत रूप से भाजपा का माना जाने वाला राजपूत वर्ग यदि कांग्रेस से जुड़ता है तो भविष्य की राजनीति में भाजपा के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय हो सकता है। इससे चितंत होकर भाजपा के पदाधिकारी गहन मंथन में लग गए है कि आखिर भाजपा की लहर कहां खो गई।
विमल शर्मा | जैसलमेर
जिलेकी राजनीति में इस बार बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लगातार भाजपा मजबूत होती दिखाई दे रही थी कि पंचायती राज चुनावों में एकदम से पिछड़ गई। विधानसभा, लोकसभा और निकाय चुनावों में जबरदस्त जीत के बाद भाजपा पूरी तरह से पंचायती राज चुनावों में भी आश्वस्त नजर रही थी लेकिन भाजपा के अति विश्वास ने उसका सफाया कर दिया।
वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस के लिए ये चुनाव संजीवनी साबित हुए। कांग्रेस ने रणनीति से काम किया और हर चुनाव हारने के बाद पंचायती राज चुनावों में अपना दबदबा कायम रखा।
जैसलमेरमें भाजपा का आत्मसमर्पण
जैसलमेरविधानसभा क्षेत्र में भाजपा की सबसे बुरी स्थिति इस बार देखने को मिली। इतनी बुरी स्थिति तो कांग्रेस की सरकार के समय में भी नहीं हुई थी। ऐसा लगने लगा कि जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र में तो भाजपा ने आत्मसमर्पण कर दिया था। टिकट वितरण, चुनाव प्रचार से लेकर प्रमुख प्रधान के चुनावों में भाजपा नतमस्तक नजर आई। इस वजह से प्रमुख दो प्रधान, उपप्रधान कांग्रेस निर्विरोध बनाने में कामयाब हो गई।
पोकरणमें भाजपा ने किया संघर्ष
जैसलमेरमें जहां आत्मसमर्पण की स्थिति देखने को मिली वहीं पोकरण में भाजपा संघर्ष करती नजर आई। पोकरण के इतिहास में भाजपा का इस बार का सबसे अच्छा प्रदर्शन देखने को मिला। पंचायत समिति सांकड़ा परंपरागत रूप से कांग्रेस के खाते में रही है वहीं इस बार भाजपा ने वहां कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी।
इसके अलावा गत बार जिला परिषद की पोकरण क्षेत्र की 8 सीटों में से भाजपा के पास दो सीटें थी जो इस बार तीन हो गई। जिले में भाजपा को जो नुकसान हुआ है वह जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र में ही हुआ है।
पंचायत समिति सांकड़ा में 1995 में भाजपा के पास 6 और कांग्रेस के पास 10 सीटें थी। वहीं 2000 में भाजपा के पास 4 और कांग्रेस के पास 12, 2005 में भाजपा के पास केवल 2 और कांग्रेस के पास 14 और 2010 में भाजपा के पास 8 और कांग्रेस के पास 10 सीटें थी। इस हिसाब से इस बार भाजपा का प्रदर्शन पोकरण में बेहतर रहा है।
कांग्रेसके लिए संजीवनी
पंचायतीराज चुनाव कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हुए। पिछले चुनावों में लगातार हार का सामना करने के बाद पंचायती राज चुनावों में कांग्रेस की जबरदस्त जीत ने उसे उत्साहित कर दिया है। यहां तक कि भाजपा की परंपरागत पंचायत समिति सम भी कांग्रेस ने इस बार छीन ली है। कांग्रेस इन चुनावों में पूरी तरह से भाजपा पर भारी पड़ती नजर आई। इससे भाजपा की चिंता बढ़ सी गई है।
कांग्रेससंगठन के नए मायने
कांग्रेससंगठन अब तक गाजी फकीर परिवार के अनुसार ही चलता आया है। लेकिन इस बार कांग्रेस संगठन में नया मजबूत गठजोड़ होता हुआ दिखाई दिया। प्रदेश सचिव रूपाराम धणदै ने फकीर परिवार के साथ मिलकर जैसलमेर जिले से भाजपा का सफाया कर दिया। मुस्लिम मेघवाल गठबंधन जैसलमेर की राजनीति में आगामी कई वर्षो तक बरकरार रहने की संभावनाएं भी जताई जा रही है, जिससे निश्चित तौर पर कांग्रेस मजबूत रहेगी।
राजपूतोंका कांग्रेस के साथ होना भाजपा की िचंता
इसबार पंचायती राज चुनावों में मुस्लिम मेघवाल का मजबूत गठबंधन हुआ वहीं राजपूत वर्ग भी कांग्रेस के पक्ष में रहा। परंपरागत रूप से भाजपा का माना जाने वाला राजपूत वर्ग यदि कांग्रेस से जुड़ता है तो भविष्य की राजनीति में भाजपा के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय हो सकता है। इससे चितंत होकर भाजपा के पदाधिकारी गहन मंथन में लग गए है कि आखिर भाजपा की लहर कहां खो गई।
जैसलमेर. महिलाएं चलाएंगी गांवों की सरकार। (फाइल फोटो)