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अधिकारियों की उदासीनता से बंद पड़ा है परिवहन कार्यालय

5 वर्ष पहले
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उपखण्डमुख्यालय पोकरण में परिवहन विभाग द्वारा नेशनल हाइवे पर कार्यालय बना गया। लेकिन पिछले दो माह से कार्यालय बन कर तैयार होने के बाद भी यह कार्यालय अधिकारियों तथा कर्मचारियों को तरस रहा है। कहने को तो यह कार्यालय हमेशा सोमवार मंगलवार को संचालित होता है। लेकिन कार्यालय का संचालन मात्र कागजों में ही होता है। धरातल में कार्यालय पर ताले जड़े हुए हैं जो मात्र अधिकारियों की मर्जी पर ही खुलते हैं। अधिकारियों की उदासीनता तथा मनमानी के कारण पोकरण शहर के साथ साथ आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों की जनता को काफी तकलीफ उठानी पड़ रही है।

सप्ताहमें दो दिन भी संचालित नहीं होता कार्यालय : परिवहनविभाग द्वारा पोकरण शहर में सप्ताह के शुरूआती दो दिनों में कार्यालय को संचालित करने का निर्णय लिया गया था। लेकिन कार्यालय के अधिकारियों द्वारा तय किए गए नियत दिनों में भी कार्यालय नहीं खुलता है। सप्ताह के शुरूआती दो दिन सोमवार मंगलवार को परिवहन विभाग कार्यालय पर कई लोग चक्कर लगाते हैं। लेकिन लोगों को मात्र मायूसी ही हाथ लगती है। अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण वहां पर ताले लगे होने के कारण लोगों को मायूस लौटना पड़ रहा है।

^परिवहन विभाग कार्यालय में स्टाफ की अनुपस्थिति के कारण ताला लगा रहता है। कई बार चक्कर लगाने के बाद भी कार्यालय नहीं खुलने के कारण मजबूरी में जैसलमेर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कैलाश,स्थानीय निवासी, पोकरण

^नेशनल हाइवे पर उरमूल के पास परिवहन विभाग कार्यालय में स्टाफ नहीं होने के कारण सोमवार मंगलवार को बंद रहता है। जिसके कारण आए दिन परेशानी उठानी पड़ रही है। कपिलकुमार, स्थानीय निवासी, पोकरण

^जैसलमेर कार्यालय में पर्याप्त स्टाफ नहीं होने के कारण हाल ही पोकरण स्टाफ को जैसलमेर में लगाया गया है। जल्द ही पोकरण कार्यालय को खोलकर उसे नियमित संचालित किया जाएगा। महेन्द्रकुमार चौधरी, इंस्पेक्टर, परिवहन विभाग कार्यालय पोकरण

पोकरण में परिवहन विभाग के कार्यालय में अधिकारियों के नहीं होने के कारण लोगों को मजबूरी में सौ किलोमीटर दूर जैसलमेर के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में लाइसेंस लेने, लाइसेंस रिन्यू करने, गाड़ी के कागज तैयार करवाने, गाड़ी के नंबर लेने तथा कई छोटे मोटे कार्यों के लिए लोगों को पोकरण से जैसलमेर के चक्कर लगाने पड़ते हैं। जिसके कारण लोगों को समय के साथ साथ आर्थिक परेशानी भी उठानी पड़ रही है।

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