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बच्चों को पढ़ने में आने वाली समस्याओं पर होगा शोध

5 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़

शिक्षकों के सामने क्या चुनौतियां हैं, बच्चों को किस विषय के अध्ययन में परेशानी रही है। कैसे सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को बहु आयामी बना सकते हैं। इन सब बिंदुओं पर शोध के जरिए अध्ययन होगा। यह शोध जिले के चयनित 143 स्कूलों में होगा। इसके लिए शिक्षा विभाग तैयारियों में जुट गया है। इस शोध की रिपोर्ट सरकार के पास जाएगी।

कुछ दिनों पहले अजीम प्रेमजी फाउंडेशन एवं राज्य सरकार के मध्य जालौर, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ एवं चित्तौड़गढ़ में सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली के बहुआयामी अध्ययन के शोध का निर्णय लिया गया था। इसमें चित्तौड़गढ़ जिले के प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के 143 स्कूलों का चयन हुआ है। इसी प्रकार जालौर जिले में माध्यमिक शिक्षा विभाग के 34, डूंगरपुर के 19, प्रतापगढ़ के 20 स्कूलों का चयन हुआ है। फाउंडेशन एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इस शोध कार्य के लिए जिले में 18 से 27 फरवरी तक का समय निर्धारित कर लिया है। इस कार्य को अंजीम फाउंडेशन के प्रिशिक्षित स्वयंसेवक देंगे। प्रशिक्षक तीन दिन तक आबंटित स्कूल में रुकेंगे तथा स्कूल की सभी गतिविधियों पर बारीकी से शोध करेंगे। इसमें विशेष रूप से वर्तमान में शिक्षकों के सामने क्या चुनौतियां हैं, बच्चों को किस विषय को पढ़ने में अधिक कठिनाई रही है। लर्निंग लेवल का आधारभूत आंकलन भी करेंगे। इस संबंध में डीईओ माध्यमिक अशोक सिंधी ने संबंधित स्कूलों के संस्था प्रधानों को निर्देश जारी किए हैं कि शोध कार्य के दौरान विद्यार्थियों की उपस्थिति तथा शिक्षकों की पूर्ण उपस्थिति हो। साथ ही प्रशिक्षकों का सहयोग भी करें। शोध कार्य पूर्ण होते ही यह रिपोर्ट सीधे शिक्षा निदेशालय एवं सरकार के पास जाएगी ताकि नई शिक्षा नीति में और बिंदुओं का समावेश हो सके।

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