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हमारी संस्कृति गर्भ कल्याणक की है, गर्भपात की नहीं:आचार्य

5 वर्ष पहले
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अाचार्यसुनील सागर ने कहा कि हमारे देश की संस्कृति गर्भ कल्याणक मनाने की है, गर्भपात करवाने की नहीं। बेटा हो या बेटी कभी भी गर्भपात नहीं करवाएं क्योंकि जो गर्भ में आता है, उसे जन्म लेने का पूरा अधिकार है। जहां तक हो सके ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें नहीं तो संतान के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन जरूर करें। यह बात उन्होंने शनिवार को अतिशय क्षेत्र शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में शुरू हुए पंच कल्याणक महोत्सव के दौरान धर्मसभा में कही।

आचार्य ने कहा कि पंच कल्याणक में प्रभु की आराधना करने से खुद के भगवान बनने का मार्ग प्रशस्त होता है। तीर्थंकर प्रभू के पूरे जीवन काल में पांच कल्याणक होते है। तीर्थंकरों के जन्म के छह महीने पहले से ही र|ों की वर्षा शुरू हो जाती है। आचार्यश्री ने कहा की जब धरती पर अधर्म का प्रभाव बढ़ता है, तब इस धरती पर तीर्थंकर का अवतरण होता है। आज सभी अपने आपको धर्मात्मा मानते है, लेकिन सही अर्थो में धर्मात्मा वही होता है, जिसमे नैतिकता होती है। इसलिए सबसे पहले अपने जीवन में नैतिकता को अपनाओ। अपने घर की सफाई करो, पड़ोसी को परेशान मत करो, व्यापार में बेइमानी मत करो, चोरी मत करो ये व्यक्ति के नैतिक आचरण है, लेकिन जो इसके विपरीत काम करता है वह कभी धर्मात्मा नहीं हो सकता।

पंचकल्याणक का आगाज

अतिशयक्षेत्र में शनिवार से शांतिनाथ र| जिन बिंब मानस्तंभ पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का आगाज हुआ। आचार्यश्री की निश्रा में पहले दिन भूमि शुद्धि, मंगल कलश स्थापना और ध्वाजारोहण किया गया। इसमें प्रतिष्ठाचार्यों ने वैदिक मंत्रोपचार के साथ इंद्र प्रतिष्ठा करवाई, साथ ही शाम को नाटक मंचन में जीवंत दृश्यों से भगवान का गर्भ कल्याणक मनाया। सीमंत संस्कार के साथ मां की गोद भराई की रस्म हुई। रात में कलाकारों ने सास्कृतिक प्रस्तुतियां दी।

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