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नदी में उफान आने पर स्कूल में छुट्टी करने की मजबूरी
प्रतापगढ़से महज चार किमी दूर राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, गोपालपुरा गांव बच्चों को स्कूल जाने के लिए रोज नदी के बहते पानी में उतर स्कूल जाना पड़ता है। बारिश के दिनों में नदी उफान पर रहती है तो बच्चों को स्कूल की छुट्टी रखनी पड़ती है।
स्कूल में बच्चों के साथ पूरे स्टाफ को नदी में उतर कर ही स्कूल जाना पड़ता है। प्रतापगढ़ से तालाबखेड़ा तक मार्ग सही है, उसके बाद दुर्गम पहाड़ी रास्तों से होकर जाने वाले गोपालपुरा मार्ग में घाट सेक्शन है, जिसकी हाल में नगर परिषद ने कटिंग कर रोड बनाया, लेकिन गोपालपुरा गांव में बने राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों की परेशानी की सुध लेने वाला कोई नहीं है। यह स्कूल ग्राम पंचायत अचलपुर में आता है। विगत कई सालों से ग्रामीण स्कूल तक जाने के लिए पुल की मांग कर रहे हैं, लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। स्कूल प्रशासन ने कई बार जिला शिक्षा अधिकारी (प्राशि) को और ग्राम पंचायत को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन स्थिति जस की तस ही है।
^स्कूल में कक्षा कक्ष की कमी के बारे में कई बार ग्राम पंचायत जिला शिक्षा अधिकारी को अवगत कराया जा चुका है। नदी पर पुल बनाने के लिए ग्राम पंचायत को भी कई बार अवगत कराया, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। बगदीराममीणा, कार्यवाहकप्रधानाध्यापक, गोपालपुरा
बारिश के समय ज्यादा रहता है खतरा
बारिशके समय जब नदी पूरे उफान पर होती है, तब बच्चों की छुट्टी ही रखनी पड़ती है। स्कूल में लगे स्टाफ को नदी के उस पार वाहन खड़े कर जूते हाथों में लेकर नदी पार करनी पड़ती है।
स्कूल आठवीं तक, कमरे दो
राजकीयउच्च प्राथमिक विद्यालय गोपालपुरा को 2006 -2007 में प्राथमिक विद्यालय से उच्च प्राथमिक तो कर दिया, लेकिन भवन वहीं रहा जिससे बच्चों को दो कमरों में अध्ययन करना पड़ता है। विद्यालय में कक्षा एक से आठवीं तक 86 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। विद्यालय में एक प्रधानाध्यापक 4 तृतीय श्रेणी अध्यापक का स्टाफ है। विद्यालय में तो मिडडे मिल का किचन शेड है ही अन्य व्यवस्था। पोषाहार भी इन्हीं दो कमरों में रखा हुआ है। जिससे बच्चों को बैठने में परेशानी होती है। पोषाहार अचलपुरा गांव से बनकर आता है। विद्यालय में पीने को पानी की टंकी तो है लेकिन पानी की व्यवस्था नहीं है। स्कूल में बने बच्चों के शौचालय की टाइल्स उखड़ चुकी है। भवन में बिजली