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बारिश में प्रकृति करती है महादेव का जलाभिषेक
प्रतापगढ़से महज 40 किमी दूर अरनोद उपखंड की फतहगढ़ ग्राम पंचायत में अरावली की दुर्गम वादियों में विराजित कमलेश्वर महादेव का बारिश के दिनों में प्रकृति जलाभिषेक करती है। यह स्थान खरखड़ा गांव से पांच किमी दूर घने जंगल के बीच पहाड़ी के नीचे एक गुफा में स्थित है। बारिश के मौसम में यहां की प्राकृतिक छटा देखते ही बनती है।
पहाड़ से गिरता झरना नीचे गुफा में कमलेश्वर महादेव का जलाभिषेक करता है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को दुर्गम पहाड़ियां और चट्टानों के बीच से गुजरना पड़ता है। मार्ग में फिसलन भरी चट्टानें और कई बाधाएं है, लेकिन जोखिम पर आस्था सदैव ही भारी रही है। श्रद्धालु 70 फीट नीचे उतरकर इस गुफा में दर्शन के लिए जाते हैं। गुफा में जाने के लिए श्रद्धालुओं को 20 सीढिय़ां उतरनी पड़ती है। गुफा इतनी संकरी है कि आदमी सीधा खड़ा नहीं हो सकता है। नीचे झुक कर ही दर्शन करने होते हैं। खरखड़ा के दौलत सिंह शक्तावत ने बताया कि कमलेश्वर महादेव मंदिर स्वयंभू मंदिर है। यह करीब 300 साल पुराना है। इस मंदिर में सबसे ज्यादा श्रद्धालु श्रावण मास में आते हैं। बाकी दिनों में घना जंगल होने से कम संख्या में श्रद्धालु पहुंच पाते हैं।
दूर-दूर से आते हैं लोग मन्नत मांगने
कमलेश्वरमहादेव के पुजारी सत्यनारायण बैरागी ने बताया कि कमलेश्वर महादेव मंदिर पर लोग दूर-दूर से मन्नत मांगने आते है। उनकी मन्नत पूरी होने पर यहां प्रसादी करते हैं। इस मंदिर में दर्शन करने से आत्म शांति की अनुभूति होती है। श्रावण मास में इस मंदिर में जावरा, मंदसौर, नीमच, दलोट बांसवाड़ा, घंटाली, सालमगढ़, नागदी, हिंगलाट, रुपिया रुडी प्रतापगढ़ से श्रद्धालु दर्शन के लिए जाते हैं। खरखड़ा गांव के प्रकाश दशरथ, बाबूलाल डांगी का मानना है कि प्रशासन इस क्षेत्र का विकास करे तो यह क्षेत्र पर्यटन स्थल बन सकता है।
वर्षों पहले लगता था गौतमेश्वर जैसा बड़ा मेला
कमलेश्वरमहादेव में आज से करीब 6 दशक पहले बड़ा मेला भरा करता था। लेकिन इस मंदिर का विकास नहीं होने और दुर्गम स्थान पर स्थित होने से धीरे-धीरे यहां मेला लगना बंद हो गया। 70 साल के नंदराम डांगी बताते हैं कि 60 -70 साल पहले यहां आदिवासियों का गौतमेश्वर महादेव जैसा बड़ा मेला लगता था। लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते इस क्षेत्र का विकास नहीं हो सका और लोग गौतमेश्वर मेले की ओर