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धर्म गुरु पूजा से ही सुख प्राप्त होता है : आचार्य सुरिश्वर महाराज

6 वर्ष पहले
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धर्मगुरु पूजा से ही सुख प्राप्त होता है। जगत के हर व्यक्ति को सुख पसंद है। दुर्गति कोई नहीं चाहता है, क्योंकि हर व्यक्ति सुख की ही चाहत रखता है। लेकिन वह आत्मा के लिए कुमार्ग चुनता है, इसीलिए उसे दुखी होना पड़ता है। जीवन में पुण्य का रास्ता थामोगे तो आने वाला भविष्य अपने आप उज्ज्वल बन जाएगा। यह बात आचार्य नवर| सागर सुरिश्वर महाराज ने कही। वे श्वैतांबर जैन उपासरा में एक दिवसीय प्रवास के दौरान उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को धर्म सभा को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा परिग्रह की पाप का मूल कारण है। परिग्रह के चलते व्यक्ति लोभ, स्वाभिमान तथा पाप की लालसा में भटकता फिरता है। जीवन में उसे कभी संतुष्टि प्राप्त नहीं होती है। दुनिया भर के पापों का अंत जाता है तब भी वह संतुष्ट नहीं होता है। उसे अपने जीवन में दया मानव सेवा तथा दान धर्म गुणों का आदर करते हुए वास उपवास का संकल्प लेकर उसे पूरा करना पड़ेगा। इससे व्यक्ति स्वयं का उद्धार कर सकेगा।

प्रतापगढ़, नीमच के लिए विहार किया

आचार्यनवर|सागर सुरिश्वर महाराज ससंघ आदिठाणा का दोपहर बाद प्रतापगढ़ की ओर नीमच के समीप के लिए प्रस्थान हुआ। उनके साथ पैदल धरियावद से 12 किमी दूर ठिकाणा जेलदा में रात्रि विश्राम किया गया। सुबह 6:30 बजे अगले मुकाम के लिए आचार्य ससंघ प्रस्थान करेंगे। इससे पहले आचार्य नवर|सागर सुरीश्वर महाराज आदिठाणा का सुबह लसाडिय़ा चौराहा से नगर में प्रवेश हुआ। आचार्य श्री संघ को जुलूस के रूप में पधरावणी की गई। लसाडिय़ा चौराहा पर पाद प्रक्षालन के बाद भक्तों ने आशीर्वाद प्राप्त किया। आचार्य की बस स्टैंड, सब्जी मंडी, रावला दरवाजा, सदर बाजार होते हुए जैन श्वेतांबर उपासरे में पधरावणी की गई। इस दौरान संघ में अक्षतर| सागारजी महाराज, विशुद्धर| सागर महाराज, अरहमर| सागरजी महाराज, उत्तमर| सागरजी महाराज, गंभीरर| सागरजी महाराज एवं साध्वी सिद्धांतज्योतिजी साध्वी सहित संघ में कई संतों के दर्शन का लाभ लोगों को मिला।

धरियावद में आचार्य नवर|सागर महाराज नगर प्रवेश करते हुए। फोटो: भास्कर

आचार्य श्री ने धर्म सभा के दौरान श्वेतांबर जैन मंदिर में उपस्थित श्रावक श्राविकाओं को संकल्प दिलाया कि बच्चों को शिक्षा के साथ साथ संस्कार एवं चारित्रिक शिक्षा भी देना आवश्यक है। इसके लिए उन्होंने धरियावद में आचार्य नवर|सागर जैन पाठशाला का शुभारंभ कराया। आचार्य नवर|सागर सुरिश्वर महाराज के सानिध्य में नव निर्माणाधीन जैन श्वैतांबर का पंचशिखर मंदिर का अवलोकन किया।