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अफीम पर रोगों का प्रकोप, 50 फीसदी नुकसान, हंकाई के आने लगे आवेदन

5 वर्ष पहले
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काली मस्सी, सफेद मस्सी लगने से रूकी डोडो में वृद्धि

जिलेभर में इन दिनों रबी की फसलों पर कीटों का प्रकोप पानी की कमी से किसानों की फसलें मुरझा कर खराब हो रही है। इस बार गेहूं चना के दाने छोटे होने के साथ उत्पादन कम होने की भी किसानों को चिंता सता रही है। जिले के तीन उपखंड में अफीम फसलों पर भी मौसम के बार-बार परिर्वतन का असर दिखाई देने लगा है। अफीम की फसल में इन दिनों काली मस्सी, सफेद मस्सी और खाखरिया रोग के कारण किसानों को औसत की चिंता सताने लगी है। जिले के करीब 50 फीसदी किसान हंकाई कराने का मन बनाने लगे हैं।

सिद्धपुरा के अफीम काश्तकार मदनलाल ने बताया कि इस बार अफीम की फसल में बुवाई से ही परेशानी शुरू हुई जो अब तक खत्म नहीं हो रही है। बार-बार मौसम परिर्वतन होने से इस बार अफीम के पौधों में वृद्धि नहीं हुई। वहीं पानी की कमी के चलते इस बार टैंकर से सिंचाई करनी पड़ रही है। अब फसल में डोडे आने लगे तो काली मस्सी, सफेद मस्सी और डोडों की वृद्धि रुक गई है। कुछ पौधो पर तो डोडे काले पड़ कर सूख रहे हैं। हालात नहीं सुधरे तो इस बार हंकाई करानी पडे़गी। वहीं अवलेश्वर के लंबरदार धनराज कुमावत ने बताया कि अवलेश्वर गांव के अफीम काश्तकार काली मस्सी, पत्तों के पीले पडने और डोडों की वृद्धि रुकने के अलावा खाखरिया रोग की शिकायत कर रहे हैं। कई काश्तकार तो हंकाई का मन बना चुके हैं। वहीं गेहूं, सरसों, अफीम, मसूर फसलें मौसम की प्रतिकूलता से प्रभावित होने लगी है। तापमान घटने-बढ़ने से रबी की फसलों का उत्पादन घटने की पूरी संभावना है। वैसे भी इस बार बुवाई भी देरी से शुरू हुई थी। इस समय गेहूं, अफीम, मसूर, इसबगोल, सरसों की फसलों को तापमान ने सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है।

जिले में इस बार औसत से कम बारिश होने से रबी की फसल का उत्पादन प्रभावित होने की पूरी संभावना है। गेहूं ,चना, मसूर के पानी की कमी और मौसम के बार-बार परिर्वतन होने से दाने छोटे रह गए। जिसके कारण उत्पादन कम होगा। वहीं सरसों के दानों में तेल की मात्रा कम रहने की संभावना है। वहीं अफीम काश्तकार इन दिनों अफीम की फसल में काली मस्सी, सफेद मस्सी और डोडो में वृद्धि रुकने की शिकायते लेकर रहे हैं। इस बार मौसम की प्रतिकूलता से अफीम में डोडे समय पूर्व ही पकने की स्टेज पर गए हैं और बार-बार तापमान बढ़ने से इनकी वृद्धि रुक गई है। जिसके चलते डोडो की साइज और दूध बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इस कारण किसानों को औसत की चिंता सता रही है। डॉ.योगेश कनोजिया, वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक केवीके प्रतापगढ़

फैक्ट फाइल

जिलेमें प्रतापगढ़, अरनोद, छोटीसादड़ी क्षेत्र में अफीम की खेती के लिए लाइसेंस दिए हैं। इस बार जिले में अफीम की फसल का रकबा बढ़कर 1100 हेक्टेयर हो गया है। वहीं जिले में इस बार 5545 अफीम काश्तकारों ने 216 गांवों में अफीम फसल की बुवाई की है। काश्तकारों के अनुसार इस बार 50 फीसदी से अधिक किसान फसलों में रोगों के प्रकोप से परेशान है।

हंकाई के आवेदन करने लगे काश्तकारे

जिलेमें मौसम की प्रतिकूलता से अफीम काश्तकार हंकाई के आवेदन करने लगे हैं। हालांकि इनकी संख्या अभी ज्यादा नहीं है। अभी तक 10 से 12 किसानों ने हंकाई के लिए आवेदन किया है, लेकिन मौसम की प्रतिकूलता से इसकी संख्या में वृद्धि हो सकती है। जगदीशमावल, जिला अफीम अधिकारी, प्रतापगढ़

अवलेश्वर. गांव में अफीम खाखरिया रोग होने पर अफीम लंबदार धनराज कुमावत को फसल रोग लगे पौधे दिखाते हुए।

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