ठाकरे, शिवसेना मुख्यालय भी थे हेडली के निशाने पर
भास्कर न्यूज नेटवर्क | मुंबई
मुंबईके 26/11 हमले के आरोपी डेविड कोलमैन हेडली ने शुक्रवार को नए खुलासे किए हैं। उसने दावा किया कि लश्कर-ए-तैयबा के निशाने पर शिवसेना मुख्यालय और पार्टी के संस्थापक बाल ठाकरे भी थे। हमले के बाद अल-कायदा उसके संपर्क में था। उसके निशाने पर दिल्ली का नेशनल डिफेंस कॉलेज भी था। वहीं, लश्कर और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के निशाने पर मुंबई एयरपोर्ट, भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (बार्क) और नेवल एयर स्टेशन भी थे। हेडली ने अमेरिका से वीडियो लिंक के जरिए विशेष जज जीए सनप की कोर्ट में चौथे दिन बयान दर्ज कराया। विशेष वकील उज्ज्वल निकम के सवालों के जवाब में उसने कहा, ‘मैं दादर में शिवसेना भवन के अंदर राजाराम रेगे (उद्धव ठाकरे के पीआरओ) से मिला था। मैंने रेगे से करीबी रिश्ते बनाने की कोशिश की। मैंने सोचा कि लश्कर भविष्य में शिवसेना भवन या उसके प्रमुख (बाल ठाकरे) पर हमला कर सकता है।’ रेगे ने भी हेडली से मुलाकात की पुष्टि की है। शिवसेना के पूर्व सदस्य रेगे ने कहा, “हेडली सेना भवन के बाहर मुझसे विलास वर्के के साथ मिला था। वह चाहता था कि मैं उसे सेना भवन अंदर से दिखाऊ। लेकिन मैंने मना कर दिया था। मेरी उससे मुलाकात सिर्फ दो मिनट की रही। उससे पहले मैं तो हेडली को जानता था और ही वर्के को। शेष| पेज 6
मुझसे26/11 हमले के बाद जांच एजेंसियों ने पूछताछ की थी।
यहां तक कि सेना नेतृत्व ने मुझसे कभी कोई सवाल नहीं पूछा। यदि पूछेंगे तो मैं हर सवाल का जवाब उन्हें दूंगा।’
भारत-पाकिस्तान युद्ध से ज्यादा नुकसान करना चाहता था अल-कायदा : हेडली
1. एनडीसी था अल-कायदा के निशाने पर :
‘मैं 26/11 आतंकी हमले के बाद फरवरी 2009 में (अल कायदा के) इलियास कश्मीरी से मिला। उसने मुझे फिर भारत जाकर एनडीसी (नेशनल डिफेंस कॉलेज) जैसी कुछ जगहों का सर्वे करने को कहा। अब्दुल रहमान पाशा ने मुझसे कहा था कि यदि हमला सफल रहा तो हम इतने ब्रिगेडियर और जनरलों को मार सकेंगे, जितने अब तक के भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्धों में भी नहीं मारे होंगे। उसके आदेश पर ही मैंने पुष्कर, गोवा और पुणे के छाबड़ हाउस का दौरा किया। यह सब सेकंडरी टारगेट्स थे।’
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2. बार्क में अपने जासूस बनाना चाहता था आईएसआई :
‘मैंने जुलाई 2008 में मुंबई के ट्रॉम्बे में बार्क की वीडियोग्राफी की थी। मैंने यह वीडियो साजिद मीर और मेजर इकबाल को सौंपे थे। मेजर इकबाल ने मुझसे कहा था कि भविष्य में बार्क के कुछ सदस्यों को चुनें जो आईएसआई के लिए काम करने और गोपनीय सूचनाएं देने को तैयार हो जाएं।’
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3. कसाब का फोटो पहचाना, गिरफ्तारी से निराश था लश्कर :
हेडली ने गिरफ्तार किए गए 26/11 के इकलौते जीवित हमलावर अजमल कसाब को तस्वीर से पहचाना। हेडली ने बताया, “यह अजमल कसाब है रहमतउल्लाह आलिया’। उससे फिर से पूरा नाम पूछा तो उसने कहा, “नाम सिर्फ अजमल कसाब है। रहमतउल्लाह आलिया का मतलब ईश्वर उसे माफ करें। कसाब की गिरफ्तारी से साजिद मीर समेत लश्कर में सब दुखी थे।’
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4. छाबड़ हाउस का सर्वे और वीडियोग्राफी भी की थी :
‘मुंबई में रेकी के बाद मेरी पाकिस्तान में लश्कर के नेता जकी-उर-रहमान लखवी, साजिद मीर, अबु काहफा और अब्दुल रहमान पाशा और मेजर इकबाल से कई मुलाकातें हुई थी। मैंने ही जुलाई 2008 में मुंबई के छाबड़ हाउस का सर्वे और वीडियोग्राफी की। मैं नहीं जानता था कि वहां कौन रहता है। साजिद मीर और पाशा ने मुझे ऐसा करने को कहा था। उन्होंने बताया था कि यह एक अंतरराष्ट्रीय स्थान है। यहां यहूदी और इजराइली लोग रहते हैं।’
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5. सिद्धिविनायक मंदिर पर हमले से मैंने मना किया :
‘आईएसआई और लश्कर-ए-तैयबा में मेरे हैंडलर नवंबर 2008 के आतंकी हमले के दौरान सिद्धिविनायक मंदिर, मुंबई एयरपोर्ट और नेवल एयर स्टेशन पर हमला करना चाहते थे। लेकिन मैंने उन्हें रोका। मुझे लगता था कि इन्हें टारगेट बनाया तो सभी 10 हमलावरों को एक ही जगह भेजना होगा। मेजर इकबाल इससे खुश नहीं था कि मुंबई एयरपोर्ट को हमले के लिए नहीं चुना।’
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6. सिद्धिविनायक मंदिर से खरीदे थे हमलावरों के लिए लाल-पीले धागे :
‘जुलाई 2008 में मैं सिद्धिविनायक मंदिर गया था। वीडियोग्राफी की। वहां से लाल और पीले धागे भी खरीदे थे। मुझे लगा कि यदि दसों हमलावर यह पहनेंगे तो लोग उन्हें भारतीय ही समझेंगे। मुझे ऐसा करने के लिए किसी ने नहीं कहा था। मैंने मंदिर के बाहर एक व्यक्ति को इन धागों को बेचते हुए देखा। उससे ही मेरे दिमाग में यह बात आई। पाकिस्तान लौटकर मैंने वह धागे साजिद मीर को सौंपे। उसे बताया कि भारत में हिंदू यह धागा बांधते हैं। यदि हमलावर यह धागा पहनेंगे तो हिंदुओं जैसे दिखाई देंगे।’
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7. साजिद मीर लाया था हमलावरों के लिए भारतीय फोन :
‘साजिद मीर ने ही दस भारतीय फोनों का इंतजाम किया था। ताकि हमलावरों को उन पर दिशानिर्देश दिए जा सके। साजिद मीर ने मुझे वाघा बॉर्डर जाकर उसकी जांच करने को कहा था। ताकि देखा जा सके कि फोन पर सिग्नल मिल रहे हैं या नहीं। मैंने साजिद मीर को बताया कि सिग्नल रहे हैं।’
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8. मैं कभी कराची के कंट्रोल रूम में नहीं गया :
‘कराची के जिस कंट्रोल रूम से आतंकियों को निर्देश दिए जा रहे थे, मैं वहां कभी नहीं गया। लखवी चाहता था कि हमलावर गेटवे ऑफ इंडिया पर उतरे, लेकिन मैंने मना किया। मैंने उसे बताया कि वहां जाना खतरे से खाली नहीं होगा। उसके लिए नेवी के सुरक्षा इंतजामों को पार करना होगा। पकड़े जाने का खतरा रहेगा। फिर लखवी भी मेरी बात मान गया। लखवी ने मुझसे कहा था कि भारत ने पाकिस्तान में जितने भी धमाके कराए हैं, यह उसका बदला लेने का सबसे अच्छा मौका है। इसमें कोई गलती नहीं होनी चाहिए।’
हेडली