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पेंशन का टेबल सर्वे- 197 बुजुर्ग, विधवा दिव्यांग भी अपात्र

5 वर्ष पहले
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लिलांबा में हुए पेंशन के सर्वे पर उठ रहे सवाल, ग्रामीणों में आक्रोश

भास्करन्यूज| रायपुर मारवाड़

क्षेत्रकी लिलांबा ग्राम पंचायत में सरकार की पेंशन योजना के लाभान्वितों की संख्या कम होती जा रही है। बीते दिनों हुए पेंशन योजना की मॉनिटरिंग सर्वे में इस ग्राम पंचायत के 197 लोगों को अपात्र मान उनकी पेंशन बंद कर दी गई है, जिनमें बीपीएल परिवार की विधवा महिलाएं, विकलांग और वृद्ध शामिल है। गौरतलब है कि इस क्षेत्र में कुल 945 पेंशनधारी है। इस लिहाज से करीब बीस प्रतिशत लोगों को अपात्र माना गया है। गौरतलब है कि सरकार की पेंशन योजना में निशक्तजनों, विधवा महिलाआें और वृद्धजनों को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए कुछ आर्थिक सहायता इस योजना के जरिए दी जा रही है। बीते कुछ सालों में कुछ अपात्र लोगों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए इन योजनाआें का गलत लाभ उठाना प्रारंभ कर दिया था। लगातार मिल रही इन शिकायतों के चलते सरकार ने 3 माह पूर्व पेंशन योजना का पुन: सर्वें करवाया और गलत सूचना देने वाले अथवा पेंशन के अपात्र लोगों की पेंशन बंद करने के आदेश दिए। लेकिन इस आदेश की गाज अपात्र लोगों के साथ कई जरूरतमंद और परेशान लोगों पर भी गिरी गई, जिसके चलते उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बंद कमरे में हुआ है सर्वे

स्थानीयपंचायत समिति सदस्य कृष्णपालसिंह के अनुसार पेंशन बंद करने के पीछे राजनीतिक द्वेष की भावना काम कर रही है। राठौड़ के अनुसार जिन लोगों की पेंशन बंद की गई है, उनमें से अधिकांश बीपीएल परिवार के लोग हैं। कई विधवा महिलाएं और विकलांग लोग किसी तरह अपना गुजारा चला रहे हैं। उनके लिए सरकारी पेंशन रोटी का जरिया बन गया है। एेसे में राजनीतिक द्वेष के चलते बंद कमरे में बैठ कर कुछ लोगों के इशारे पर इन लोगों को अपात्र मानकर इनकी पेंशन काट दी गई है। राठौड़ ने दुबारा सर्वे करवाने और पात्र लोगों की पेंशन पुन: प्रारंभ करवाने को लेकर रायपुर बीडीआे शोभा पिल्लई को ज्ञापन भी सौंपा है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। ज्ञापन में जिन कार्मिकों द्वारा इस सर्वे को किया गया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई है।

पात्र है तो मिलेगा लाभ

^स्थानीयजनप्रतिनिधियों ने कुछ पात्र व्यक्तियों के नाम कट जाने की जानकारी दी है। उन्हें ऐसे लोगों की जानकारी देने को कहा था, लेकिन अब तक उन्होंने सूची उपलब्ध नहीं करवाई है। निकटवर्ती ग्राम पंचायत के कार्मिकों के द्वारा सर्वे करवाएंगे, जो वास्तव में पात्र है, उन्हें योजना का पूरा लाभ मिले यह सुनिश्चित किया जाएगा। -शोभापिल्लई, विकास अधिकारी, पंचायत समिति, रायपुर।

177 वृद्धजन भी अपात्र

पंद्रहविधवा और पांच विकलांग लोगों के साथ ही 177 वृद्धजन भी पेंशन योजना से बाहर कर दिए गए हैं। चार हजार की आबादी वाले इस ग्राम पंचायत क्षेत्र में कुल 945 पेंशनधारक हैं। इस लिहाज से अपात्र माने गए लोगों की संख्या काफी अधिक है। दुबारा हुए इस सर्वे को सही माना जाए तो जिन लोगों के कार्यकाल में इस तरह की फर्जी पेंशन जारी हुई वे लोग दोषी साबित होते हैं अथवा जारी करने वाले सही हैं तो इस सर्वे पर सवाल उठना लाजमी है। एक हजार में से दस या बीस लोगों द्वारा गलत जानकारी देकर पेंशन उठाने की बात की जाती तो समझ में सकता था, लेकिन बीस प्रतिशत लोग फर्जी तरीके से पेंशन उठा रहे हो ऐसा होने की आशंका के बराबर है।

कैसे कर दिया अपात्र

जिन197 लोगों को पेंशन योजना के लिए अपात्र माना गया है। उनमें 15 विधवा महिलाएं और पांच दिव्यांग शामिल है। अब सवाल यह उठता है कि वृद्धावस्था पेंशन में तो व्यक्ति गलत जानकारी देकर इस योजना का गलत फायदा उठा सकता है, लेकिन विकलांग अथवा विधवा पेंशन जारी होने के लिए जमा करवाए जाने वाले दस्तावेजों के फर्जी तरीके से जारी हो सकने की आशंका बहुत कम है। गौरतलब है कि विकलांग पेंशन का लाभ लेने के लिए आवेदन पत्र के साथ सरकारी चिकित्सक द्वारा जारी विकलांगता प्रमाण पत्र संलग्न करना आवश्यक है। वहीं विधवा पेंशन के लिए वही महिला पात्र है, जो अपने पति का मृत्यु प्रमाण पत्र आवेदन पत्र के साथ संलग्न करे। इन दोनों ही दस्तावेजों का फर्जी तरीके से बन पाना बहुत मुश्किल है क्योंकि ये दस्तावेज पेंशन ही नहीं अन्य भी कई परिलाभ लेने के लिए काम सकते हैं। ऐसे में अगर इस तरह की पेंशन बंद किए जाने वाले लोग वास्तव में अपात्र है तो इनके दस्तावेजों की पूरी जांच कर इनकी सत्यता परखी जाए और फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र अथवा विकलांग प्रमाण पत्र बनाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो।

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