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स्कूल में एक पीरियड ऐसा जिसमें चुप बैठना मना

7 वर्ष पहले
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आमतौरसे क्लासरूम में बच्चों को शोर मचाने के लिए मना किया जाता है, चुप रहने के लिए कहा जाता है, लेकिन अब हालात बदलने वाले हैं। सब कुछ ठीक रहा तो अगले कुछ दिन में ही छत्तीसगढ़ के तमाम सरकारी स्कूलों में एक ऐसा पीरियड शुरू किया जाने वाला है, जिसमें चुप बैठना मना होगा और बच्चों को बोलने के लिए कहा जाएगा।

सरकारी स्कूलों में छह पीरियड होते हैं। अब स्कूल शिक्षा विभाग को सिर्फ यही तय करना है कि नया पीरियड कौन सा होगा? स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हर कक्षा में टीचर बच्चों के सामने एक टॉपिक देंगे, जैसे गांव, खेल, राजनीति, फिल्म, समाज या कोई और विषय। इसमें बच्चों से बारी-बारी से अपनी बात रखने के लिए कहा जाएगा। जिस छात्र को जो समझ आए, वो वही बात बोले।

इस संबंध में कुछ दिन पहले लोक शिक्षण संचालनालय ने जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजा था। इसमें पहले पीरियड के रूप में इसे रखने की बात कही थी।

ताकि बच्चे खुलकर भावनाएं व्यक्त करें

स्कूलशिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस कवायद को शुरू करने के पीछे मंशा यह है कि बच्चों को बोलने का मौका देना। ऐसा अवसर देना जहां वे खुलकर अपनी भावनाएं व्यक्त कर सके। इससे उनकी झिझक भी दूर होगी और वे मुखर बन सकेंगे।

सीबीएसई में पहले से ही चल रहा है इस तरह का प्रयास

बच्चोंकी झिझक दूर करने और मुखर बनाने के लिए सीबीएसई स्कूलों से पहले से ही ऐसे पीरियड हैं। कंटीन्यूअस एंड कॉम्प्रिहेंसिव इवेल्यूएशन (सीसीई) सिस्टम सीबीएसई स्कूलों में 2-3 साल पहले लागू किया गया था। इसी के तहत अंग्रेजी और हिंदी के 40 से 45 मिनट के पीरियड में बच्चों की बोलने और सुनने की क्षमता का टेस्ट होता है। सुनने की क्षमता के लिए टीचर एक पैराग्राफ पढ़ता है, इसके बाद इसी पैराग्राफ से वह सवाल पूछता है।