श्रीगंगानगर. जिले में स्वाइन फ्लू का प्रकोप जारी है। स्वास्थ्य विभाग के प्रयास करने के बावजूद संभावित और पॉजिटिव मरीजों की संख्या थमने का नाम नहीं ले रही। सोमवार को जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू जैसे लक्षणों वाले 9 संभावित मरीज और पहुंचे। इससे ऐसे मरीजों की संख्या बढ़कर अब 51 हो गई है। दो की रिपोर्ट पॉजिटिव मिलने से मरीजों की संख्या 11 हो गई है।
गौरतलब है कि रविवार को जिला अस्पताल में 9 लोगों को संभावित मरीज मानते हुए सैंपल लिया गया था। जिनकी सोमवार को रिपोर्ट आई। इसमें दो की रिपोर्ट पॉजिटिव मिली है। वहीं सोमवार को भी अस्पताल के स्वाइन फ्लू वार्ड में सर्दी खांसी जुकाम के कई मरीज पहुंचे।
इनमें से स्वाइन फ्लू जैसे लक्षणों के मिलने पर 9 लोगों के सैंपल लिए गए। सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि संभावित मरीजों के सैंपल बीकानेर लैब में भेज दिए गए हैं। इनकी मंगलवार शाम तक रिपोर्ट आने की संभावना है।
मास्क के प्रकार : दो प्रकार के होते हैं, एक टू लेयर का जो कि सामान्य होता है। दूसरा थ्री लेयर का जो बाजार में एन-95 के नाम से मिलता है।
मास्क की लाइफ : टूलेयर मास्क की लाइफ अधिकतम 3 घंटे होती है, नमी आते ही यह खराब हो जाता है। एन- 95 की लाइफ 8 घंटे होती है।
बाजार में मूल्य : टूलेयर मास्क की कीमत 6 से 17 रुपए तक है जबकि एन-95 मास्क 110 से 150 रुपए तक का है।
इसलिए जरूरी मास्क: स्वाइनफ्लू का वायरस हवा के जरिए ही सांस से शरीर में जाता है। जिससे स्वस्थ व्यक्ति भी इसका शिकार हो सकता है।
निदेशालय ने ऑर्डर ही नहीं दिया: जैन
स्वास्थ्य निदेशालय से ऑर्डर ही नहीं मिला है। निदेशालय जब हमें डिमांड और बजट देगा। तब हम टेंडर निकालेंगे। इसके बाद प्रदेशभर के अस्पतालों में फेस मास्क सप्लाई किए जाएंगे।
नवीनजैन, निदेशक राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन
प्रदेशभर में स्वाइन फ्लू फैला है। अब तक कई लोगों की मौत भी हो चुकी, लेकिन स्वास्थ्य निदेशालय की बेफिक्री देखिए। निदेशालय ने स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए सबसे अहम फेस मास्क ही एक साल से नहीं खरीदे। हालत यह है कि सब अस्पतालों में रिलीफ सोसायटी के बजट से फेस मास्क खरीदे जा रहे हैं।
‘भास्कर’ ने सोमवार को प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालाें, ड्रग वेयर हाउस, स्वास्थ्य निदेशालय आरएमएससी के रिकार्ड को खंगाला तो बड़ा खुलासा यह हुआ कि सरकारी अस्पतालों में फेस मास्क तो हैं, लेकिन सब अस्पताल प्रभारियों ने मास्क अपने-अपने स्तर पर खरीदे हैं। स्वास्थ्य निदेशालय ने करीब एक साल से फेस मास्क के लिए आरएमएससी यानी राजस्थान मेडिकल सर्विस कार्पोरेशन को डिमांड ही नहीं भेजी है।
स्कूल में बच्चों को स्वाइन फ्लू की सूचना से विभाग में मची खलबली
रायसिंह नगर के गांव 7 पीएस के सरकारी माध्यमिक विद्यालय के एक अध्यापक द्वारा स्वाइन फ्लू के लक्षणों की जानकारी के लिए चिकित्सा विभाग के कंट्रोल रूम में फोन करने से विभाग में हड़कंप मच गया।
कंट्रोल रूम से मिली सूचना के बाद जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने रायसिंहनगर ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने मौके पर चिकित्सा टीम को भेजा। चिकित्सा टीम ने बच्चों में सामान्य खांसी होने पर राहत की सांस ली।
जानकारी अनुसार ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहनलाल सोलंकी के निर्देश पर गांव की स्वास्थ्य कार्यकर्ता कमलजीत कौर ने स्कूल में जाकर खांसी एवं जुकाम से पीड़ित बच्चों की जांच की तथा खांसी की करीब 23 बच्चों को टेबलेट दी। इसके बाद डॉ. मनोज कुमार के नेतृत्व में एक चिकित्सा दल पुन: जांच के लिए गया।
डॉ. मोहनलाल सोलंकी ने बताया कि स्कूल के अध्यापक ने स्टेट कंट्रोल रूम में फोन कर स्वाइन फ्लू के लक्षणों की जानकारी चाही थी। परंतु विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करवाई है। कोई भी बच्चा स्वाइन फ्लू जैसे लक्षणों से पीड़ित नहीं पाया गया।