पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • आत्म केंद्रता के लिए सामूहिकता को भूलना ठीक नहीं : डॉ. नरेंद्र

आत्म केंद्रता के लिए सामूहिकता को भूलना ठीक नहीं : डॉ. नरेंद्र

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
श्रीगंगानगर. आजकल लोग सामूहिकता की ओर से ध्यान हटाकर आत्म केंद्रता की ओर ज्यादा ध्यान देते हैं। इसी कारण लोगों में प्रेमभाव, एकता जैसी चीजों की कमी आई है।

भले ही हमारा झुकाव पाश्चात्य संस्कृति की ओर हो, लेकिन हमें अपने भारतीय जीवन मूल्यों को भी नहीं भूलना चाहिए। यह बात अंध विद्यालय परिसर स्थित सुंदरम पैलेस में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय गोष्ठी भारतीय साहित्य और कुटुम्ब के दूसरे दिन रविवार को युवा आलोचक डॉ. नरेंद्र ईष्टवाल ने कही। अतिथि के रूप में प्रो. नंदकिशोर पांडे डॉ. महेश महेश्वरी मौजूद थे। अध्यक्षता प्रो. त्रिभुवन नाथ शुक्ला ने की।

रविवार को चार सत्र आयोजित किए गए, जिसमें विभिन्न कवियों ने पत्र पठन किया और विचार व्यक्त किए। फिरोजाबाद से आए कवि डॉ. राम स्नेही लाल शर्मा ने अपनी कविताओं के माध्यम से परिवार के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि परिवार के बुजुर्ग घर की छत की तरह होते हैं। मगर आज की पीढ़ी शादी के बाद अक्सर अपने माता-पिता को अकेला छोड़ देती है। यह स्थिति अत्यंत चिंतनीय है।
मुंबई से अाए डॉ. उमाशंकर पाल ने भी परिवार की महत्ता बताई। इसके अलावा डॉ. लक्ष्मी अय्यर, डॉ. नवीन तिवाड़ी, समेत अन्य रचनाकारों ने भी विचार व्यक्त किए। मंच संचालन कृष्ण कुमार आशु ने किया।