कर चोरी का ठिकाना बना राजाखेड़ा
कस्बेका व्यापार कर चोरी का बड़ा अड्डा बन चुका है। जहां प्रतिदिन रात्रि को कई ट्रक परचून का माल आगरा उत्तर प्रदेश की मंडियों से राजाखेड़ा पहुंचता है। गौरतलब है कि यह सारा माल आगरा से उत्तर प्रदेश के ही ग्राम जगतूपुरा और मंसुखपुरा के नाम से माल की खरीददारी की जाती है, लेकिन यह सिर्फ उत्तर प्रदेश के व्यापार कर अधिकारियों को भ्रमित करने के लिए किया जाता है। लेकिन हकीकत यह है कि इस माल को ट्रकों में भरकर देर रात्रि को राजाखेड़ा के व्यापारियों के गोदामों में उतारा जाता है।
राजाखेड़ा का बाजार पिछले एक दशक में बहुत ही बड़ी मण्डी का रूप ले चुका है। राजाखेड़ा के बाजार में तीन दर्जन गांवों के साथ उत्तर प्रदेश के भी एक दर्जन से अधिक गांवों के ग्रामीण यहां पर दैनिक खरीददारी करने के लिए आते हैं। कस्बे में प्रतिदिन लाखों रुपए की बिकी की जाती है। यहां के व्यापारी आगरा से खरीददारी करके व्यापार कर की पूरी चोरी का मुनाफा कर लेते हैं।
उत्तर प्रदेश के आगरा में यमुना के किनारे पर बसी कई ट्रांसपोर्ट कम्पनियां इस कर चोरी के खेल अंजाम दे रही हैं। राजाखेड़ा के व्यापारी आगरा से खरीददारी कर सारा माल इन्हीं ट्रांसपोर्ट कंपनियों के यहां पर माल पहुंचाया जाता है। यह सारा माल बिना बिल का होता है। ट्रांसपोर्ट कंपनियां ऐसे माल की बिल्टियों को राजाखेड़ा की सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के गांवों के नामों से बिल्टी बनाकर माल को ट्रकों में लोड कर दिया जाता है और रात्रि के समय में कस्बे में लाकर गोदामों मे भर दिया जाता है।
सीटीओ मार्कण्ड सिंह चौहान ने बताया कि शीघ्र की मामले की जांच कराकर उिचत कार्यवाही की जाएगी।
नहीं मिलता बिल
कस्बेके बाजार में सामान खरीदने के बाद उपभोक्ताओं के मांगने पर व्यापारियों द्वारा बिल नहीं दिया जाता है। क्योंकि सामान का बिल देने से बिक्री प्रमाणित होती है। जबकि व्यापारियों के पास स्वयं ही खरीद का बिल उपलब्ध नहीं होता है। व्यापार कर चोरी का खेल बड़े स्तर पर किया जा रहा है, लेकिन फिर भी जिले के व्यापार कर अधिकारी इस मुद्दे पर अब तक गंभीरता नहीं दिखा पाए है।
कईगुना है ट्रांसपोर्टेशन कीमत
ट्रांसपोर्टरभी इस धंधे में पूरी तरह से मलाई उतार रहे हैं। कर चोरी के इस माल के परिवहन के एवज में वे सामान्य माल भाड़े के मुकाबले 3-4 गुना तक भाड़ा वसूल करते हैं। लोगों का आरोप है कि इस गोरखधंधे में व्यापार कर अधिकारियों व्यापारियों के बीच सेतु के रूप में ट्रांसपोर्टर कार्य करते हैं। जिसके एवज में मोटी राशि भी वसूल की जाती है और परिवहन किए जा रहे माल के पकड़े जाने की भी गारंटी व्यापारियों को दी जाती है।