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कमल पुष्प के आकार में माता की आराधना

7 वर्ष पहले
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राजसमंद. नौरतांकी तीसरी रात गरबा पांडालों में रंगत जमने लगी। माता की आरती के साथ गरबे की शुरुआत हुई, इसके बाद कहीं फिल्मी तो कहीं राजस्थानी पारंपरिक गरबा धुनों पर युवक-युवतियों ने देर तक नृत्य किया। युवतियां आकर्षक वेशभूषा में थीं। पांडालों में घेरा जल्दी ही पूरा हो गया। शुरुआत दो ताली, फिर तीन ताली बाद में डांडियों पर राउंड फ्री स्टाइल में गरबा खेला गया। पंखिड़ा रे उड़ ने जाई जे पांवागढ़ रे..., मूं तो गई थी मेले..., घोर अंधियारी रे रातलड़ी में निकल्या चार असवार..., चरर चरर म्हारो चक डोल चाले... सहित अन्य गरबा धुनों पर नृत्य किया गया। पांडालों में देर रात तक रौनक रही। शहर की द्वारकेश वाटिका में गरबा नृत्य।

कुंभलगढ़। गरबा रमती युवतियां।

द्वारकेश वाटिका में गरबा महोत्सव।

राजसमंद. महावीरभवन में शनिवार को माता पद्मावती की आराधना के तीसरे दिन साध्वी युवा प्रेरिका मयंक मधुर के सान्निध्य में महिलाओं को कमल पुष्प के आकार में बैठाकर माता के जाप का नयनाभिराम नजारा प्रस्तुत किया। इसमें चित्ताकर्षक भगवान का समवशरण सजाया गया। इसके चारों तरफ कमल पुष्प के रूप में झांकी सजाई गई। गुलाबी रंग की साड़ी वाली महिलाएं पत्तियों का हरे रंग की साड़ी वाली महिलाएं तना डंठल का रूप धरे बैठी हुई थी। इससे पूर्व जावरा (म.प्र.) के संघ का स्वागत स्थानीय संघ अध्यक्ष बाबूलाल हिंगड़, अशोक पामेचा, महेश हिंगड़, भेरूलाल हिंगड़ ने किया।