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प्राथमिक स्कूल की क्रमोन्नति पर एक साल बाद भी असमंजस
खमनोर के सपतलियों का भीलवाड़ा स्कूल नहीं हो पाया क्रमोन्नत
गांवगुड़ापंचायत के सपतलियों का भीलवाड़ा राजकीय प्राथमिक स्कूल को उच्च प्राथमिक में क्रमोन्नत करने के आदेश में हुई गलती का एक साल बीतने पर भी सुधार नहीं हो पाया है। स्कूल के नाम में गलती का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। संशोधित आदेश नहीं होने से अभी तक पांचवीं से आगे की कक्षाएं शुरू ही नहीं हो पाई हैं। प्राइमरी एज्युकेशन ले चुके आदिवासी छात्र-छात्राओं को आगे की पढ़ाई करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सत्र 2013-14 के तहत 21 जून 2013 को सरकार के प्राथमिक शिक्षा (आयोजना) अनुभाग ने एक आदेश जारी खमनोर ब्लॉक के पांच प्राथमिक स्कूलों को उच्च प्राथमिक में क्रमोन्नत करने के आदेश जारी किए थे। इनमें एक स्कूल को सिर्फ राप्रावि भीलवाड़ा लिख दिया था। हालांकि ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षा कार्यालय ने इस आदेश का मतलब पूर्व के प्रस्तावों के अनुसार सपतलियों का भीलवाड़ा ही माना था। ग्रामीणों ने सुनवाई का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत स्कूल क्रमोन्नत के आदेशों में सुधार की लिखित में अर्जी देकर मांग की। इस पर बीईईओ ने स्कूल के नाम में गलती को सुधारने के लिए डीईईओ राजसमंद के माध्यम से शिक्षा निदेशालय बीकानेर को रिपोर्ट भेजी। इसके बाद अभी तक संशोधित आदेश जारी नहीं हुआ है। लोग पिछले साल स्कूल क्रमोन्नत के आदेश के अनुसार आठवीं तक का स्कूल मान रहे हैं, जबकि सरकार का आदेश नहीं होने से पांचवीं से आगे की कक्षाएं शुरू करने में अड़चन रही है। बस्ती के आसपास और कोई स्कूल नहीं होने से इससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इन स्कूलों के लिए हुए थे आदेश
गतसत्र में सरकार द्वारा जारी आदेश में खमनोर ब्लॉक की चार प्राथमिक स्कूलों को आठवीं में क्रमोन्नत करने के आदेश हुए थे। इनमें धांयला पंचायत में कोटेला भीलबस्ती, टांटोल पंचायत के पासुनिया, खमनोर पंचायत में सोई की भागल को राप्रावि से राउप्रावि में क्रमोन्नत करना बताया था। चौथी स्कूल राप्रावि भीलवाड़ा लिख दी, इससे भ्रम की स्थिति बनी।
पढ़नेके लिए तीन किलोमीटर जंगल का सफर
सपतलियोंका भीलवाड़ा बस्ती के विद्यार्थियों को पांचवी से आगे की पढ़ाई के लिए तीन किलोमीटर लंबा जंगल का रास्ता पार कर र|ावतों की भागल जाना पड़ता है। कई छात्र-छात्राओं के नामांकन इसी स्कूल में हैं,