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कुंवारिया में मेले का उद्घाटन कल पशुओं की खरीद-फरोख्त शुरू
राजसमंदपंचायत समिति की ओर से कुंवारिया में लगने वाले पांच दिवसीय 53वें जोहिड़ा पशु मेले का उद्घाटन गुरुवार को होगा। मेला परिसर में पशुओं व्यापारियों का आना शुरू हो गया है। मेला प्रशासन ने भी मेले की पूरी तैयारियां कर दी है। मेले के उद्घाटन से पूर्व मंगलवार को सवा लाख में भैंस बिकी है।
मेला प्रशासन ने पशु मेले की तैयारियां अंतिम चरणों में चल रही है। मेला परिसर में जिन व्यापारियों के प्लॉट आवंटन हो गया। व्यापारी अपनी दुकानों की सफाई कर दुकानों को सजाना शुरू कर दिया है। मेलास्थल पर मौत का कुआं, चकरी, बड़े झूले, डोलर, जादूगर के शो पहुंचना शुरू हो गए हैं। मौत का कुआं झूले वालों ने मेलास्थल पर सामान जमाने की तैयारियां शुरू कर दी है। राजसमंद प्रधान देऊ बाई, उपप्रधान सुरेश जोशी ने मेला की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। प्रधान देऊबाई के कार्यकाल का अंतिम मेला है। आगले साल पंचायती राज के चुनाव होने हैं। पंचायत समिति के जनप्रतिनिधियों अंतिम मेला होने से मेले का आयोजन अच्छा करने की तैयारियां की गई।
सवा लाख में भैंस बिकी
मेलेके उद्घाटन में अभी एक दिन शेष है। मेले में पशुओं का क्रय-विक्रय शुरू हो गया। भैंस विक्रेता चावडिय़ा के अमरदान सिंह चारण ने मुर्रा नस्ल की भैंस सारणिया खेड़ा निवासी गंगाराम कुमावत को सवा लाख रुपए में बेची है। पशु विक्रेता अमरदान के पास काफी ऊंचे दामों की भैंसें भी है।
ऐसा है मेले का इतिहास
राजसमंदपंचायत समिति की ओर से कुंवारिया में 1962 में आश्विन शुल्क की नवरात्रा के साथ ही मेले का आयोजन किया गया। इस मेले के संस्थापक पूर्व विधानसभा अध्यक्ष निरंजननाथ आचार्य, पूर्व प्रधान कैप्टन दौलत सिंह पूर्व सरपंच तेजसिंह थे। तीनों के ही प्रयासों से मेला परिसर की 214 बीघा भूमि क्षेत्र में बड़ा मेला भरता है। मेले में काफी दूर-दूर से व्यापारी मेलार्थी आते है। कुंवारिया मेले का 2012 में पचास साल पूरे होने पर स्वर्ण जयंती मना चुका है।
कुंवारिया. मेलास्थल पर ड्रेगन के आकार के झूले के आकार वाली ड्रेगन पर रंग करता झूला वाला।