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चौबीस घंटे हो सकता है धर्म और ध्यान: मुनि शुभकरण

7 वर्ष पहले
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राजसमंद|संबोधि पवनट्रस्ट धानीन में रविवारीय ध्यान शिविर का मुनि शुभकरण के सान्निध्य में हुआ।

धर्मसभा में मुनि शुभकरण ने कहा कि धर्म और ध्यान करने का समय चौबीस घंटे है। हमें हर क्षण का भी प्रमाद नहीं करना चाहिए। हर सांस के साथ हमारा जीवन और मृत्यु जुड़े हुए हैं। धर्म और ध्यान एक ही है।

धर्म का अर्थ है परमात्मा के साथ रहना, परमात्मा में लीन रहना। सम्यकज्ञान, सम्यक दर्शन और सम्यकचरित्र इन तीनों में धर्म है। इनकी आराधना करना हमारी आत्मा का स्वभाव है। हमारी चेतना का भी एक स्वभाव है उस चेतना के स्वभाव को धर्म कहा। ध्यान द्वारा परमात्मा को प्राप्त किया जा सकता है। धर्म और ध्यान के प्रति हमेशा हमें जागरूक रहना चाहिए, इसलिए नियमित ध्यान और साधना करनी चाहिए।