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गुरु नानक देव का 545वां जन्म दिवस मनाया

7 वर्ष पहले
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राजसमंद| गुरुनानकजयंती पर कांकरोली रेलवे स्टेशन स्थित गुरु सिंघ सभा भवन में गुरुनानक देव जी का 545वां जन्म दिवस मनाया गया। इसमें लुधियाना से आए ज्ञानी प्रदीप सिंह की अगुवाई में रागी जत्थे ने गुरुवाणी का कीर्तन कर गुरुनानक देव के उपदेशों पर प्रकाश डाला। गुरुनानक देव का फरमान था कि हर व्यक्ति को अपने गुरु का प्रिय सिख (शिष्य) बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए उसे मेहनत कर हक की कमाई करनी चाहिए। दूसरों का हक मारकर रिश्वतखोरी से धन एकत्र नहीं करना चाहिए। जाति-पाति के भेदभाव से दूर रहकर एक ही जाति अर्थात मनुष्यता को जिंदा रखना चाहिए। जन्म से कोई नीच नहीं बल्कि नीच वह है जिसका मन विकारों, अवगुणों बुरे विचारों से भरा हुआ है। हमें धर्मी बनने का दिखावा नहीं करना चाहिए। इस प्रकार गुरुपर्व मनाने का मतलब तभी सिद्ध है यदि हम गुरु साहब की शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारे। शबद किर्तन के बाद लंगर आयोजित किया गया। इसमें हरमेंदर सिंह, मलकीत सिंह, गुरुदयाल सिंह, तरणवीर सिंह, सतनाम सिंह, इंद्रजीत सिंह, कुलदीप कौर, चरणजीत कौर, मनप्रीत कौर, रानी, मोहनजीत कौर, प्रभजोत कौर सहित कई सिख समुदाय के लोग शामिल हुए।

रंगोलीबनाई: सरस्वतीमहिला मंडल लोहिया कम्प्यूटर सेन्टर के संयुक्त तत्वाधान में गुरूनानक जंयति दिवस पर रंगोली प्रतियोगिता हुई। मंडल सचिव बसंती सालवी ने बताया कि गुरुनानक ने मानव के जीवन में ईश्वर का साक्षात्कार बाहरी साधनों से नहीं आंतरिक साधनों से होना बताया। प्रशिक्षक कल्पना चौहान सौरभ सिंह ने छात्राओं को विभिन्न प्रकार के रंगों से रंगोली बनवाई। इसमें 15 छात्राओं ने भाग लिया। प्रतियोगिता में प्रथम आंकाक्षा गोस्वामी, द्वितीय संगीता सेन, तृतीय भावना राजपूत रहीं।

राजसमंद। गुरुसिंघ सभा सभागार में गुरुनानक जयंती पर सबद किर्तन में उपस्थित महिला-पुरुष। तथा रंगोली प्रतियोगिता में भाग लेती प्रतिभागी। भास्कर