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- अब कहां बची पीपल की छांव, हृदय के घाव बहुत गहरे हैं...
अब कहां बची पीपल की छांव, हृदय के घाव बहुत गहरे हैं...
अंकुरस्कूल की सहभागिता में रविवार को काव्य गोष्ठी का आयोजन बृजबिहारी सनाढ्य की अध्यक्षता हुआ। कार्यक्रम में मुख्यातिथि राधारमण सनाढ्य, डिंगल भाषा कवि सुखदेव सिंह चारण, विशिष्ट अतिथि बाल लेखिका कुसुम अग्रवाल थे। काव्य गोष्ठी का आगाज बंकेश सनाढ्य द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। नारायणसिंह राव ने उजड़ती ग्रामीण संस्कृति की व्यथा को, अब कहां बची पीपल की छांव, हृदय के घाव बहुत गहरे है.. रचना से चित्रित किया। प्रमोद सनाढ्य ने साम्प्रदायिक सद्भाव को उकेरते हुए रामायण की चौपाई और आयत कुरान को लेकर मैंने लिख डाली एक गजल हिन्दुस्तान की.., कमल चंद्र यादव कमल ने मैं हिंदु की हिंदवाणी जग में सूर्यप्रकाश दीक्षित ने बिलों से निकलते देखा जिनको मैंने यारों..., परितोष पालीवाल ने शराब के दुष्प्रभाव का गड्ढा खोदे हाथ ले गिरकर फिर पछताव, गोविन्दलाल औदिच्य ने खुद जीओ ओरों को भी जीने दो गीत प्रस्तुत किया। कुसुम अग्रवाल, चतुर कोठारी, सुखदेव सिंह चारण, अफजल खां, दिनेश सिंह बड़वा, गोविंद सनाढ्य, दीपक सनाढ्य, कमल अग्रवाल ने भी रचनाएं पेश की।