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\"साधु जरूरी नहीं, अच्छा श्रावक बने हर इंसान\' : मुनि जतनमल

7 वर्ष पहले
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राजसमंद| मुनिजतनमल ने श्रावकों से कहा है कि हर व्यक्ति साधु नहीं बन सकता है लेकिन उसे अच्छा श्रावक जरूर बनना चाहिए। व्यक्ति काे संयम को जानने की जरूरत भी है।

वे भिक्षु बोधि स्थल राजनगर में धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। मुनि ने कहा कि भाग्यशाली आत्मा ही साधु बनने का अवसर प्राप्त करती है। छोटी अवस्था में साधु बनने का मतलब है इस आत्मा रूपी चद्दर को बिना दाग लगाए रखना। अत: अच्छे श्रावक बनने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने श्रावक के आठ प्रकार बताए। माता-पिता के तुल्य, भाई और मित्र के तुल्य अच्छे श्रावक हैं। श्रावक में यथार्थ के प्रति श्रद्धा होनी चाहिए। मन में मोक्ष की कामना रखें, वीतरागी बनने का प्रयास करें।

मुनि आनंद कुमार ने कहा कि दुनिया में उत्कृष्ट मंगल धर्म होता है। धर्म अहिंसा, संयम और तपस्या। जिस व्यक्ति के जीवन में अहिंसा, संयम और तप रूपी धर्म होता है उसके जीवन में मंगल होता है।

मुनि ने कहा कि हम अपनी साधना के प्रति जागरूक रहें। धर्मसभा में मनोहरलाल मादरेचा, लाभचंद मांडोत, डॉ. मदनलाल सोनी, भगवतीलाल, पानी बाई सहित श्रावक श्राविकाएं उपस्थित थे।