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आचार्य तुलसी मानवता के मसीहा थे : मुनि जतनमल

7 वर्ष पहले
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भिक्षुबोधि स्थल में मंगलवार को मुनि जतनमल मुनि आनंद कुमार के सान्निध्य में आचार्य तुलसी की मासिक पुण्यतिथि मनाई।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुनि जतनमल के नमस्कार महामंत्र से हुआ। मुनि जतनमल ने कहा कि आचार्य तुलसी मानवता के मसीहा और क्रांति के अग्रदूत थे। वे चन्देरी के पावन ताल में कमल बन कर खिले थे। अज्ञान के महातमस में वैदिक मशाल बनकर जले थे। उन्होंने कहा कि अपने लिए नहीं वरन मानव जाति के लिए जीने वाला व्यक्ति भगवान के रूप में प्रतिष्ठित होता है। वो मानवता का मसीहा कहलाता है।

आचार्य तुलसी भी मानवता के सजग प्रहरी थे। जिन्होंने अणुव्रत के माध्यम से मानव धर्म की प्रतिष्ठा की। उन्होंने नैतिकता को ही सबसे बड़ा धर्म बताया। इस दौरान धर्मसभा में कई श्रावक श्राविकाएं उपस्थित थे।