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यहांतक कि सेना नेतृत्व ने मुझसे कभी कोई सवाल नहीं पूछा। यदि पूछेंगे तो मैं हर सवाल का जवाब उन्हें दूंगा।’
भारत-पाकिस्तानयुद्ध से ज्यादा नुकसान करना चाहता था अल-कायदा : हेडली
1. एनडीसी था अल-कायदा के निशाने पर : ‘मैं26/11 आतंकी हमले के बाद फरवरी 2009 में (अल कायदा के) इलियास कश्मीरी से मिला। उसने मुझे फिर भारत जाकर एनडीसी (नेशनल डिफेंस कॉलेज) जैसी कुछ जगहों का सर्वे करने को कहा। अब्दुल रहमान पाशा ने मुझसे कहा था कि यदि हमला सफल रहा तो हम इतने ब्रिगेडियर और जनरलों को मार सकेंगे, जितने अब तक के भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्धों में भी नहीं मारे होंगे। उसके आदेश पर ही मैंने पुष्कर, गोवा और पुणे के छाबड़ हाउस का दौरा किया। यह सब सेकंडरी टारगेट्स थे।’
2.बार्क में अपने जासूस बनाना चाहता था आईएसआई : ‘मैंनेजुलाई 2008 में मुंबई के ट्रॉम्बे में बार्क की वीडियोग्राफी की थी। मैंने यह वीडियो साजिद मीर और मेजर इकबाल को सौंपे थे। मेजर इकबाल ने मुझसे कहा था कि भविष्य में बार्क के कुछ सदस्यों को चुनें जो आईएसआई के लिए काम करने और गोपनीय सूचनाएं देने को तैयार हो जाएं।’
3.कसाब का फोटो पहचाना, गिरफ्तारी से निराश था लश्कर : हेडलीने गिरफ्तार किए गए 26/11 के इकलौते जीवित हमलावर अजमल कसाब को तस्वीर से पहचाना। हेडली ने बताया, “यह अजमल कसाब है रहमतउल्लाह आलिया’। उससे फिर से पूरा नाम पूछा तो उसने कहा, “नाम सिर्फ अजमल कसाब है। रहमतउल्लाह आलिया का मतलब ईश्वर उसे माफ करें। कसाब की गिरफ्तारी से साजिद मीर समेत लश्कर में सब दुखी थे।’
4.छाबड़ हाउस का सर्वे और वीडियोग्राफी भी की थी :‘मुंबई मेंरेकी के बाद मेरी पाकिस्तान में लश्कर के नेता जकी-उर-रहमान लखवी, साजिद मीर, अबु काहफा और अब्दुल रहमान पाशा और मेजर इकबाल से कई मुलाकातें हुई थी। मैंने ही जुलाई 2008 में मुंबई के छाबड़ हाउस का सर्वे और वीडियोग्राफी की। मैं नहीं जानता था कि वहां कौन रहता है। साजिद मीर और पाशा ने मुझे ऐसा करने को कहा था। उन्होंने बताया था कि यह एक अंतरराष्ट्रीय स्थान है। यहां यहूदी और इजराइली लोग रहते हैं।’
5.सिद्धिविनायक मंदिर पर हमले से मैंने मना किया :‘आईएसआई औरलश्कर-ए-तैयबा में मेरे हैंडलर नवंबर 2008 के आतंकी हमले के दौरान सिद्धिविनायक मंदिर, मुंबई एयरपोर्ट और नेवल एयर स्टेशन पर हमला करना चाहते थे। लेकिन मैंने उन्हें रोका। मुझे लगता था कि इन्हें टारगेट बनाया तो सभी 10 हमलावरों को एक ही जगह भेजना होगा। मेजर इकबाल इससे खुश नहीं था कि मुंबई एयरपोर्ट को हमले के लिए नहीं चुना।’
6.सिद्धिविनायक मंदिर से खरीदे थे हमलावरों के लिए लाल-पीले धागे : ‘जुलाई2008 में मैं सिद्धिविनायक मंदिर गया था। वीडियोग्राफी की। वहां से लाल और पीले धागे भी खरीदे थे। मुझे लगा कि यदि दसों हमलावर यह पहनेंगे तो लोग उन्हें भारतीय ही समझेंगे। मुझे ऐसा करने के लिए किसी ने नहीं कहा था। मैंने मंदिर के बाहर एक व्यक्ति को इन धागों को बेचते हुए देखा। उससे ही मेरे दिमाग में यह बात आई। पाकिस्तान लौटकर मैंने वह धागे साजिद मीर को सौंपे। उसे बताया कि भारत में हिंदू यह धागा बांधते हैं। यदि हमलावर यह धागा पहनेंगे तो हिंदुओं जैसे दिखाई देंगे।’
7.साजिद मीर लाया था हमलावरों के लिए भारतीय फोन : ‘साजिदमीर ने ही दस भारतीय फोनों का इंतजाम किया था। ताकि हमलावरों को उन पर दिशानिर्देश दिए जा सके। साजिद मीर ने मुझे वाघा बॉर्डर जाकर उसकी जांच करने को कहा था। ताकि देखा जा सके कि फोन पर सिग्नल मिल रहे हैं या नहीं। मैंने साजिद मीर को बताया कि सिग्नल रहे हैं।’
8.मैं कभी कराची के कंट्रोल रूम में नहीं गया : ‘कराचीके जिस कंट्रोल रूम से आतंकियों को निर्देश दिए जा रहे थे, मैं वहां कभी नहीं गया। लखवी चाहता था कि हमलावर गेटवे ऑफ इंडिया पर उतरे, लेकिन मैंने मना किया। मैंने उसे बताया कि वहां जाना खतरे से खाली नहीं होगा। उसके लिए नेवी के सुरक्षा इंतजामों को पार करना होगा। पकड़े जाने का खतरा रहेगा। फिर लखवी भी मेरी बात मान गया। लखवी ने मुझसे कहा था कि भारत ने पाकिस्तान में जितने भी धमाके कराए हैं, यह उसका बदला लेने का सबसे अच्छा मौका है। इसमें कोई गलती नहीं होनी चाहिए।’
फिरशुरू होगी...
योजनामें 62,600 पशुओं के बीमा का लक्ष्य रखा गया है। बैंक प्रतिनिधि, पशु चिकित्सक और पशुपालक मिलकर बीमा की राशि का निर्धारण करेंगे। पूर्व में केंद्र सरकार 100 प्रतिशत सहायता राशि से यह योजना चला रही थी, लेकिन 2013 में यह बंद कर दी गई। इसे फिर से वित्त वर्ष 2014-15 से 16-17 तक के लिए लागू किया गया। हालांकि 2014-15 में इस योजना के लिए केंद्र से पैसा नहीं अाया। वहीं 2015-16 में राज्य सरकार ने अपना अंशदान जारी करने में देरी कर दी। राज्य सरकार की ओर से फरवरी में योजना के लिए एक करोड़ रुपए का अंशदान जारी किया गया। लेकिन विभाग अब इस योजना को अगले वित्त वर्ष से ही जारी करेगा।
ऐसेहोगा क्लेम निर्धारण: बीमाक्लेम के लिए पशुपालक को सबसे पहले पशु चिकित्सक को फोन करना होगा। इसके बाद पशु चिकित्सक पशु के पोस्टमार्टम की रिपोर्ट तैयार करेगा। यह रिपोर्ट बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों को भेजी जाएगी। योजना में देशी और संकर गाय, भैंस, घोड़ा, ऊंट, गधा, सांड, पाड़े का बीमा किया जाएगा। इसमें अधिकतम पांच पशुओं का ही बीमा करवाया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त भेड़, बकरी, सूअर को कैटल यूनिट मानकर बीमा करवाया जाएगा। इसमें एक यूनिट में 10 पशुओं को गिना जाएगा।
राजसमंदआरटीओ कार्यालय...
इसपर शाम को छापा मारकर कार्रवाई की गई। टीम ने कैशियर उमेश मीणा से केश का मिलान करवाया। इसमें आठ लाख 90 हजार की रसीदें कटी हुई थी। लेकिन कैशियर के पास सात लाख 25 हजार रुपए ही मिले। एक लाख 65 हजार रुपए कम मिलने पर कैशियर मीणा से टीम ने बाकी रुपयों के बारे में पूछताछ की। उसने यह राशि दलाल नीलेश की ओर से जमा नहीं करना बताया। इस पर टीम ने नीलेश को बुलाकर पूछताछ की। नीलेश ने टीम को बताया कि उसने एक लाख 78 हजार रुपए टैक्स के तौर पर जमा करवाए। इसकी रसीद बताई, उसने कार्यालय में कोई भी बकाया नहीं होना बताया। विरोधाभासी बयान पर कैशियर मीणा पर गबन की आशंका जताई है। इसे लेकर कार्यालय की सभी फाइलों और रिकॉर्ड की जांच की गई। कार्रवाई शाम पांच बजे से देर रात तक चलती रही। कार्रवाई के दौरान कार्यालय में जिला परिवहन अधिकारी ओपी बैरवा, परिवहन उपनिरीक्षक नहीं थे। एसएसपी चौधरी ने बताया कि इन अधिकारियों से मोबाइल पर भी संपर्क नहीं हो पाया।