पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • तेरे हाथों की रोटी मुझे पकवान लगती है... पर बजी तालियां

तेरे हाथों की रोटी मुझे पकवान लगती है... पर बजी तालियां

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
राजसमंद | जिलाकारागृह में रविवार को काव्य गोष्ठी कारागृह उपाधीक्षक कैलाश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता में रखी गई।

काव्य गोष्ठी में शेख अब्दुल हमीद ने गजल अपने मन का दर्द..., नारायणसिंह राव ने अणजाण अपराध..., प्रमोद सनाढ्य ने तेरे हाथों की रोटी भी मुझे पकवान लगती है..., अफजल खां अफजल ने झुलस रही है बस्ती..., जवानसिंह सिसोदिया ने दीवो परवान सूं कैसे... राजस्थानी रचना प्रस्तुत की। कमलचंद यादव ने होनी हो होकर रहती है..., बख्तावर सिंह चूंडावत ने मरते-मरते जी रहे लोग..., बंकेश सनाढ्य ने सिर्फ कटोरा नहीं है..., भगवानलाल बंशीवाल ने जैसा कर्म करें हम..., गोविंद सनाढ्य ने पिताजी..., धीरेंद्र शर्मा ने जब मैं पैदा हुआ आंख से आंसू निकले... रचना सुनाकर बंदियों में नैतिक संस्कार का भाव जागृत किया। काव्य गोष्ठी साकेत साहित्य संस्थान के स्थापना दिवस पर रेडक्रॉस सोसायटी की सहभागिता से हुई। मुख्य अतिथि रेडक्रॉस सोसायटी के मानद सचिव राजकुमार दक थे।

राजसमंद . जिलाकारागार में काव्य पाठ करती कवयित्री। फोटो : भास्कर