- Hindi News
- बनास नदी से 24 घंटे बाद निकाला जा सका युवक का शव
बनास नदी से 24 घंटे बाद निकाला जा सका युवक का शव
भास्कर न्यूज|पीपली आचार्यान
गांवके पास बनास नदी में रविवार दोपहर डूबे युवक का शव चौबीस घंटे बाद सोमवार दोपहर को निकाला जा सका। नहाते वक्त उसके पांव नदी के बीच गहरे गड्ढे में रेती में फंस गए थे। घुटने तक पैर रेत में धंसने से वह ऊपर नहीं सका। सोमवार को गोताखोरों ने सात घंटे की मशक्कत कर शव काे निकाला।
रविवार दोपहर बनास नदी में पीपली आचार्यान निवासी अशोक (35) पुत्र लक्ष्मीलाल गर्ग नहाते वक्त डूब गया था। रविवार देर रात तक पता नहीं लगने पर रेस्क्यू रोक दिया था। सोमवार को सुबह गोताखोरों ग्रामीणों की टीम ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। गोताखोरों ने बनास नदी में एक किनारे से दूसरे किनारे पर दो रस्सियां बांधी। दोनों रस्सियों के बीच में गोताखोरों की मदद के लिए और रस्सियां बांधकर तलाश की गई। रविवार को जहां अशोक नहा रहा था, वहां सात घंटे की तलाश के बाद शव मिला। सात-आठ फीट की दूरी पर ही बड़ा गहरा गड्ढा बना हुआ है। इस गड्ढे में शव की तलाश करते हुए नवलपुरा निवासी शंकर सिंह गौड़ तलाश करते हुए गड्ढे की तरफ बढ़ा तभी शंकर सिंह के हाथ में अशोक की गर्दन गई। शंकर सिंह ने नदी में अन्य गोताखोरों को शव रेत में धंसा होने की जानकारी दी। मौके पर गोताखोर गोवर्धनदास वैष्णव करण सिंह ट्यूब लेकर आए। बड़ी मशक्कत के बाद शव को रेत से बाहर निकालकर ट्यूब पर लाद कर किनारे लाए। शव को आरके अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए ले गए। मौके पर राजसमंद डीएसपी ओमकुमार, कुंवारिया नायब तहसीलदार पेमाराम कांकरोली द्वितीय थानाधिकारी नंदलाल जाप्ते सहित तैनात रहे।
नदीमें खड़ा मिला शव
बनासनदी में डूबे युवक अशोक का शव नदी के गहरे गड्ढे में खड़ा हुआ मिला। संभवतया तैरते हुए गहरे खड्डे में पांव रेती धंस गए। अशोक ने ऊपर आने के लिए काफी हाथ पैर भी मारे होंगे। लेकिन रेत में धंसता चला गया। अशोक के प्राण निकलने के बाद रेत में शव खड़ा हो गया।
गौरतलब है कि रविवार को गोताखोरों ने इस गड्ढे में ढूंढने का प्रयास किया। लेकिन रेती धंसने की वजह से गोताखोर आगे नहीं बढ़ सके। सोमवार को नदी में पानी का बहाव कम होने से गोताखोर शंकरसिंह ने अशोक का शव ढूंढ निकाला। आस-पास के कई गांवों के ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। इनमें से कुछ युवक तो तैराक भी थे। वे नदी में उतरे।
शव देखकर बिलख पड़े परिजन
मृतकके परिजन भी नदी पर ही थे। शव नहीं निकलने से