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जो सरकारी भवन जर्जर घोषित उन्हीं में चल रहे स्कूल-दफ्तर

6 वर्ष पहले
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ये सरकारी आवास जर्जर मरम्मत के योग्य

अलवरमें राजकीय आवास संख्या 67, 69 71, मुंडावर में उपखंड अधिकारी आवास, एमजेएम आवास, तीन सिपाही आवास, एसएचओ आवास, तहसीलदार, नायब तहसीलदार आवास, एमओ, पीएमओ आवास, तिजारा में 5 सामान्य प्रशासन के क्वार्टर, चिकित्सा विभाग का स्टॉफ क्वार्टर, न्यायिक विभाग का क्वार्टर, पुलिस विभाग का क्वार्टर शामिल हैं। कोटकासिम में एक नं. डॉक्टर क्वार्टर, किशनगढ़बास में राजस्व विभाग के सात जर्जर एक मरम्मत योग्य क्वार्टर, चिकित्सा विभाग के पांच क्वार्टर, जलदाय विभाग के 3 जर्जर 8 मरम्मत योग्य क्वार्टर, न्यायिक विभाग का एक क्वार्टर, रैणी में 12 क्वार्टर चिकित्सा विभाग के, राजस्व विभाग का एक क्वार्टर, राजगढ़ में 3 न्यायिक विभाग के एक विभाग का क्वार्टर, रामगढ़ के गोविंदगढ़ में चिकित्सा विभाग का एक क्वार्टर लक्ष्मणगढ़ में राजस्व विभाग का एक क्वार्टर शामिल हैं।

इनविभागों के भवन क्वार्टर शामिल

विभागोंके बीच समन्वय का अभाव है। इस कारण भवनों का हाल बेहाल है। इनमें सामान्य प्रशासन, पुलिस, राजस्व, शिक्षा, न्यायिक, चिकित्सा, जलदाय कृषि विभाग के भवन या क्वार्टर शामिल हैं।

ये सरकारी कार्यालय क्षतिग्रस्त

अलवरमें महल चौक में कार्यालय कमांडेंट होम गार्ड ट्रेनिंग सेंटर, वार्ड सात का पुलिस चौकी भवन अकबरपुर का पटवार घर तीन-चार साल से क्षतिग्रस्त है। मुंडावर में बंदीगृह बैरक नं. एक, कोटकासिम के पुर, भौंकर भंगेरी के पटवार घर, रैणी में क्वार्टर नं. दो में उप स्वास्थ्य केंद्र, राजगढ़ का सीनियर हाई सेकेंडरी स्कूल, रामगढ़ तहसील के गोविंदगढ़ में पुलिस थाना, तहसील भवन, एससी हॉस्टल, लक्ष्मणगढ़ में पुराना थाना भवन, पटवार घर, तहसील भवन, बहरोड़ में राजकीय माध्यमिक विद्यालय नं. तीन में दो कमरे राजकीय बाल छात्रावास भवन शामिल हैं।

किशनगढ़बास. जर्जर हाल में कस्बे का पटवार गृह।

नगर संवाददाता | अलवर

जिलेमें 81 सरकारी भवन जर्जर हैं। इनमें 15 सरकारी कार्यालय और 66 सरकारी आवास हैं। इनमें से कई तो ऐसे हैं जो कभी भी गिर सकते हैं। सार्वजनिक निर्माण विभाग बकायदा इन भवनों पर बदहाली की सूचना चस्पा कर चुका है। इसके बावजूद कुछ भवनों में तो दफ्तर स्कूल चल रहे हैं। इन भवनों में सरकारी स्कूल, छात्रावास, पुलिस थाना, तहसील, बंदी बैरक के साथ ही एसडीएम, तहसीलदार, डॉक्टर, एसएचओ सहित अन्य कर्मचारियों के सरकारी आवास भी शामिल हैं। संबंधित विभागों का कहना है कि बजट नहीं होने से इन भवनों की मरम्मत नहीं हो पा रही है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारी कहते हैं कि कई भवन तो पिछली तीन-चार साल से जर्जर की सूची में शामिल हैं। इसके बावजूद भी मरम्मत नहीं होने से उनकी बदहाली बढ़ती जा रही है। उन्होंने भवन की जांच कर संबंधित विभागों को स्थिति के बारे में अवगत करा दिया है।

यहहै मरम्मत का तरीका

पीडब्ल्यूडीका काम है भवनों की स्थिति के बारे में जानकारी देना। सरकारी भवनों की देखरेख। इनमें किसी प्रकार का निर्माण का काम होना है तो उस विभाग पीडब्ल्यूडी से एस्टीमेट लेकर राशि जमा कराके मरम्मत का काम करा सकता है।

^पीडब्ल्यूडीने भवनों की स्थिति के बारे में संबंधित विभागों को अवगत करा दिया है। विभाग ही कार्य नहीं करा रहे है तो जर्जर भवन के कारण किसी भी प्रकार की घटना की जिम्मेदारी उनकी है। सुनीलकुमार गुप्ता, एसई, पीडब्ल्यूडी

लक्ष्मणगढ़. क्षतिग्रस्त हालत में कस्बे का पटवार घर।