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इंटरनेट ने मिलाया खोये परिवार से, बेटों को देख भर आईं आंखें

7 वर्ष पहले
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मांडोलीगांव में पिछले 15 दिन से रह रहे एक व्यक्ति को इंटरनेट की वजह से अपना खोया परिवार वापस मिल गया। पश्चिम बंगाल के इस व्यक्ति को मारवाड़ी भाषा समझ नहीं रही थी, इसलिए वह किसी को अपनी समस्या नहीं बता पाया।

लोग उसे पागल समझकर भोजन और अन्य सामग्री देते रहे। मांडोली के एक जागरूक व्यक्ति ने इंटरनेट के जरिए उसके खोये परिवार का पता लगाकर प्रशासनिक अधिकारियों की मदद से उसे अपने गांव भेजा। जानकारी के अनुसार तीन माह पहले पश्चिम बंगाल के मुर्सीदाबाद जिले के एरवाली निवासी रक्षाकर फूलमाली बेंगलूरू में नौकरी के लिए रेल से जा रहा था। रास्ता भटक जाने से वह रेल के जरिए राजस्थान पंहुच गया। इस दौरान वह घूमते हुए 15 दिन पहले क्षेत्र के मांडोली कस्बे में पहुंचा। मारवाड़ी भाषा उसकी समझ में नहीं आने के कारण वह अपनी बात किसी से तो कह पा रहा था और ही किसी ग्रामीण को उसके द्वारा बोली जाने वाली बंगाली भाषा समझ पा रहे थे। लाेग उसे पागल समझने लगे। मांडोली के जयसिंह राव भी उसके खाने की व्यवस्था कर रहे थे। बार बार कुछ अजीब सी भाषा में बड़बड़ाते रहने के कारण राव को एक दिन वह भटका हुआ मुसाफिर प्रतीत हुआ और उन्होंने बंगाली भाषा बोलने वाले एक अन्य युवक को रामसीन से बुलवाया। रक्षाकर से उसकी स्थानीय भाषा में बात करवाने पर हकीकत सामने आई और बाद में इंटरनेट के जरिए मुर्सीदाबाद जिले के पुलिस अधीक्षक, कंट्रोल रूम खेडग़ंज पुलिस थानाधिकारी से दूरभाष पर संपर्क किया गया। जिस पर उन्होंने उसके परिजनों को राजस्थान भेजा और उसके दोनों पुत्र उसे साथ लेकर अपने गांव ले गए।

छोड़ चुके थे पिता के मिलने की उम्मीद

इंटरनेटपर संपर्क साधने के बाद अपने पिता को लेने मांडोली पहुंचे बड़े बेटे जीवन ने बताया कि पिता की गुमशुदगी को लेकर उन्होंने थाने में रिपोर्ट भी दर्ज करवायी थी। उसने बताया कि काफी दिन तक खोजबीन के बाद उसके पिता के वापस मिलने की उम्मीद पूरा परिवार कब का छोड़ चुका था। पिता के मिलने के बाद दोनों बेटों ने राव ग्रामीण का शुक्रिया अदा किया।

बेंटों को देख भर आई आंखें

तीनमाह बाद बेटों को देख पिता और बेटों की आंखों से बरबस ही आंसू फूट पड़े। बेटों की मायूस आंखें बिना कहे ही अपने पिता की गुमसुदगी में तीन माह तक सहे दर्द को साफ बयां कर रही थी। उसके दोनों बेटे मन ही मन भगवान का शुक्रिया अदा कर रहे थे। यह दृश्य द