पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • पहली कहानी : राजस्थ

पहली कहानी : राजस्थ

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
फंडा यह है कि

अगरआप अपने किसी भी प्रोडक्ट की क्वालिटी बरकरार रखना चाहते हैं तो जरूरी है कि आप खुद उसका इस्तेमाल करें। कोशिश ये भी होनी चाहिए कि आपके कर्मचारी भी उस प्रोडक्ट का उपयोग करें।


पहली कहानी : राजस्थान के राजसमंद जिले का एक छोटा सा कस्बा भीम। इसके बीचों-बीच है, राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय। इस स्कूल में करीब 700 लड़कियां पढ़ती हैं। ये सभी दो अक्टूबर को साफ-सुथरी यूनीफॉर्म में शहर की सड़कों पर रैली निकालते दिखीं। इनके हाथों में तख्तियां थीं। और ये बुलंद आवाज में नारे लगा रही थीं। ‘शिक्षा हमारा अधिकार, अध्यापक दो सरकार’। ‘पढ़ने वाले 700 हैं, पढ़ाने वाले तीन हैं’। ‘शिक्षा का अधिकार दिया, पढ़ाने वाला कोई नहीं’। ये नारे स्कूल की समस्या को साफ बयां कर रहे थे। और इसी को सामने लाने के लिए लड़कियों ने विरोध का यह तरीका निकाला था। उन्हें इस आयोजन में पूरे शहर का समर्थन भी मिला।

खास बात ये रही कि लड़कियों को इस तरह प्रदर्शन करने के लिए किसी समूह या राजनीतिक दल ने उकसाया नहीं था। उन्होंने खुद होकर यह कदम उठाया। उनकी मांग सीधी सी थी कि स्कूल में नए टीचर्स की भर्ती की जाए। उनके आंदोलन को दबाने के लिए अधिकारियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की। पुलिस वालों ने डराया भी। कहा कि अगर उन पर कार्रवाई कर दी गई तो उनकी पढ़ाई बर्बाद हो जाएगी। इस पर लड़कियों ने उन्हें टका सा जवाब दे दिया, ‘पढ़ाई होती ही कहां है जो बर्बाद होगी’। इस विरोध प्रदर्शन में एक और खास बात ये रही कि लड़कियों ने कभी, कहीं भी, अनुशासन नहीं तोड़ा। सभी लड़कियां नौवीं से बारहवीं कक्षा की थीं, जो पक्के इरादे के साथ सड़कों पर उतरी थीं। विडंबना देखिए कि स्कूल का पूरा मैनेजमेंट और इतनी लड़कियों की जिम्मेदारी सिर्फ तीन टीचर्स के भरोसे थी। मैथ, साइंस, हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, इतिहास, भूगोल जैसे बेसिक सब्जेक्ट पढ़ाने के लिए कोई टीचर नहीं है। फर्स्ट ग्रेड टीचर्स की 11 पोस्ट हैं। सब की सब पिछले 10 साल से खाली पड़ी हैं। प्रिंसिपल की पोस्ट तक आठ साल से खाली है। मौजूदा तीन टीचर्स में से ही एक ने एक्टिंग प्रिंसिपल की जिम्मेदारी संभाल रखी है। स्कूल के बगल में ही ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस है। कस्बे के सभी जिम्मेदार अफसर वहां मिल जाते हैं। या आते-जाते रहते हैं। उनको स्कूल के हालात की जानकारी भी है। स्कूल की ओर से लिखित में भी इन अफसरों से कई बार गुहार की जा चुकी है। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। मजबूर होकर लड़कियों को विरोध प्रदर्शन करना पड़ा। उन्होंने सिर्फ रैली निकालकर नारेबाजी की बल्कि स्कूल के मेनगेट पर त