पाली । पाली की प्रदूषण समस्या के स्थाई समाधान एवं प्रदूषण फैलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग को लेकर किसान पर्यावरण संघर्ष समिति के बैनर तले गुरुवार को सैकड़ों किसान सड़क पर उतर आए। अप्रत्याशित रूप से किसानों ने कलेक्ट्रेट के बाहर सभा कर जोरदार प्रदर्शन किया। शाम को कलेक्टर को ही ज्ञापन देने की जिद पर अड़े किसान नेताओं ने इनके चैंबर के बाहर बैठ कर करीब चार घंटे तक इंतजार किया। रात आठ बजे कलेक्टर रोहित गुप्ता पिछले दरवाजे से चैम्बर में पहुंचे।
कलेक्टर के बाहर आकर ही ज्ञापन लेने की बात को लेकर पुलिसकर्मियों से किसान नेताओं की झड़प भी हुई। कलेक्टर के बाहर ज्ञापन लेने आने से इंकार करने पर किसानों ने कुछ महिलाओं से ज्ञापन दिलाने का प्रयास किया। रात दस बजे तक चले घटनाक्रम के बाद किसानों ने महिलाओं के मार्फत ही जयपुर में सीएम वसुंधरा राजे को ज्ञापन सौंपने का कहते हुए घर लौट गए। किसानों के धरना प्रदर्शन को लेकर सुबह से ही कलेक्ट्रेट परिसर में कड़ा पुलिस जाब्ता रहा।
सुबह 9:30 से रात 8:30 तक- किसानों की बदलती रही रणनीति, अलर्ट रही पुलिस
सुबह 9.30 बजे : प्रदूषणकी समस्या को लेकर किसान पर्यावरण संघर्ष समिति के बैनर तले जैतपुर, नेहड़ा और आसपास के किसान पाली पहुंचे, कलेक्ट्रेट के बाहर धरना शुरू।
शाम4 बजे तक : वक्ताओंने पाली के प्रदूषण और किसान को हो रही समस्याओं को लेकर भाषण दिया। प्रशासन उद्यमियों को आड़े हाथों लिया।
शाम4.30 बजे : किसान पर्यावरण संघर्ष समिति के बैनरतले किसान नारे लगाते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे। कलेक्टर मौजूद नहीं थे। मारवाड़ जंक्शन में थे। किसान उन्हें ही ज्ञापन देने की बात पर अड़े।
शाम6 बजे- इंतजारकर रहे किसान वहीं बिस्तर मंगवाकर पड़ाव डालकर बैठे।
रात8 बजे : पुलिस प्रशासन की सूचना पर कलेक्टर पहुंचे कलेक्ट्रेट। मुख्य द्वार पर किसानों के जमा होने के कारण साइड से किया चैंबर में प्रवेश। प्रतिनिधि मंडल को बुलाया।
किसानों की मांग- कलेक्टरबाहर आकर लें ज्ञापन। कलेक्टर ने मना किया तो महिलाओं को भेजा ज्ञापन सौंपने। कलेक्टर ने इसके लिए मना किया।
रात8.30 बजे : नारे बाजीसे माहौल गरमाया। किसानों पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। गुस्साए किसानों का अंत में जयपुर में सीएम को ही ज्ञापन देने का निर्णय, प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते किसान लौटे घरों को।
कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने के लिए जाते महिला प्रतिनिधि मंडल को पुलिस ने मैन गेट पर ही रोक दिया।
पाली| सेंटरफॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने गुरुवार को फैक्ट्रियों से निकलने वाले रंगीन पानी की सैंपल रिपोर्ट को सार्वजनिक कर इसे आम लोगों के लिए काफी खतरनाक माना है। संस्था की तरफ से जून महीने में पाली के ट्रीटमेंट प्लांटों से लेकर बांडी नदी, नेहड़ा बांध तथा कई कृषि कुओं से लिए गए 15 सैंपल की जांच रिपोर्ट में साफ ताैर पर कहा है कि इस पानी के सेवन से इंसान को कैंसर दिल की बीमारी होने के साथ उनकी आंखों की रोशनी जा सकती है। साथ ही खेतों में सिंचाई के काम में लेने पर फसलें भी कास्टिक के कारण जहरीली ही होंगी। रिपोर्ट में बताया गया है कि फैक्ट्रियों के पानी से 40 किमी इलाके के कुओं में रंगीन पानी निकल रहा है। यह पानी इंसान तो क्या जानवर भी नहीं पी सकते। अंतरराष्ट्रीय मानक प्रणाली को अपनाते हुए इन सैंपलों की कराई गई जांच में पानी का पीएच, बीओडी, टीएसएस, सीओडी तथा सल्फेट की मात्रा तय मानक से कई गुना अधिक पाई गई है। कुछ नमूनों में तो फिनोलिक कम्पाउंड भी पाए गए हैं, जो कई घातक तत्वों के मिश्रण होने के बाद बन रहा है।
पर्यावरणीयसंतुलन के लिए जरूरी जलस्रोतों में जीव-जंतु भी सीओडी की मात्रा अधिक होने के कारण ऐसे पानी में सांस भी नहीं ले सकते।
सीएसई की कॉर्डिनेटर स्वाति सिंह रमाकांत ने गुरुवार सुबह पेंशनर भवन में पत्रकारों किसान नेताओं के समक्ष अपनी जांच रिपोर्ट जारी की। पहले प्रोजेक्टर पर पाली की स्थिति का प्रजेंटेशन दिया गया। दोनों प्रतिनिधियों ने इस रिपोर्ट को जारी करने के बाद कहा कि इसके लिए पूरी तरह से यहां की ट्रीटमेंट प्रणाली जिम्मेदार है। साथ ही यह भी कहा कि जो प्लांट बने हुए हैं, उनकी काफी पुरानी तकनीक के साथ ही सूती वस्त्रों के प्रोडक्शन का पानी ही ट्रीट करने में सक्षम हैं, जबकि यहां पर फैक्ट्रियों में अब सिंथेटिक्स कपड़े का भी उत्पादन हो रहा है। इसके चलते ट्रीटमेंट प्लांट पूरी तरह से नाकारा हो चुके हैं। इसका असर यह हो रहा है कि ट्रीट होने के बाद छोड़ा जा रहा पानी जिस दिशा में जा रहा है उसकी जमीन को पूरी तरह से बर्बाद करने के साथ ही कृषि कुओं को भी नाकारा बना रहा है।
यहां से लिए सैंपल और यह निकला नतीजा
-4 सैंपल- ट्रीटमेंट प्लांटों के आउटलेट से
रिजल्ट- सभी सैंपल फेल, इस पानी से जमीन की उर्वरा शक्ति क्षीण, कुएं भी बर्बाद
- जैतपुर-नेहड़ा क्षेत्र से लिए 2 सैंपल
रिजल्ट- पानी में कई घातक रसायन, हैवी मेटल से यह पानी बीमारियों को पैदा कर रहा
- जैतपुर में खुले कुएं से एक सैंपल
रिजल्ट- पूरा पानी प्रदूषित, पानी खेती के लिए भी उपयोगी नहीं
- बांडी नदी में अलग-अलग स्थानों से लिए तीन सैंपल
रिजल्ट- पानी में सीओडी, बीओडी, फिनॉलिक सल्फेट की मात्रा तय मानकों से कई गुना ज्यादा
- जमीन पर एकत्रित पानी के 4 सैंपल
रिजल्ट - पानी ना तो पीने योग्य और ना ही उपयोग किया जा सकता है।
- जेतपुर में एक कुएं का सैंपल
रिजल्ट -पानी पूरी तरह से खराब, सीआेडी की मात्रा इतनी अधिक की जलीय जंतु भी अंदर नहीं रह सकते।
किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष पुखराज पटेल, महामंत्री महावीरसिंह सुकरलाई एडवोकेट चंद्रभानु राजपुरोहित ने आराेप लगाया कि प्रदेश की मुख्यमंत्री महिला हैं। महिलाओं से ज्ञापन नहीं लेकर उन्होंने महिला शक्ति का अपमान किया है। किसान चार घंटे तक उनके इंतजार में बैठे रहे। पहले उन्होंने किसानों का आग्रह नहीं माना। प्रतिनिधि मंडल बुलाने के बजाय वे बाहर पोर्च में आकर ही ज्ञापन ले लेते तब भी उनका बड़प्पन ही होता। किसान निराश हुए। ये महिलाएं भी दिनभर से धरने में शामिल थीं। किसी किसान को बुरा नहीं लगे इसीलिए उन्हें भेजने की बात हुई। हम शांतिपूर्वक ज्ञापन साैंपना चाहते थे लेकिन कलेक्टर नहीं माने। अब हम जयपुर में इन्हीं महिलाओं से मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिलवाएंगे। इस मामले में कलेक्टर का पक्ष जानने की कोशिश की गई। लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
संस्था ने इंटरनेशनल स्टैंडर्ड की लैब में इन सैंपलों की जांच के बाद रिपोर्ट सार्वजनिक की है। संस्था की विश्वसनीयता भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की है। ऐसे में इस रिपोर्ट के आधार पर कोई भी मामला कोर्ट में या खुले मंच पर ले जा सकता है। सरकार भी इस मामले को गंभीरता से ले सकती है।
रिपोर्ट कितनी विश्वसनीय
सीएसईका दावा है कि पानी के इन सभी नमूनों की जांच अंतरराष्ट्रीय मानकों और पद्घतियों से की गई है, जहां टीएसएस, क्लोराइड, सल्फेट का निर्धारण अमेरिकन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन, अमेरिकन वाटर एसोसिएशन और वाटर एनवायरमेंट फेडरेशन के संयुक्त प्रकाशन के आधार पर की गई वहीं पानी में घुले केमिकल की जांच का निर्धारण अमेरिकी एनवायरमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी के मानक पद्घति के द्वारा किया गया।
सीएसई ने 2007 में भी पाली के पानी की जांच करवाई थी। कॉर्डिनेटर स्वातिसिंह ने बताया कि तब 60 फीसदी सैंपल फेल थे। इस बार 80 फीसदी सैंपल फेल हैं। यानी पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है।
2007 में 60 तो अब 80 फीसदी सैंपल फेल
आगे क्या : जेडएलडी ही समाधान
सीएसईने इस समस्या का एकमात्र समाधान जीरो लिक्विड डिस्चार्ज को ही बताया है। प्रजेंटेशन में तमिलनाडु के त्रिपुर शहर में हुए इसी तकनीक से हुए सुधार के बारे में भी बताया।
ये बीमारियां हो सकती हैं सीधे तौर पर
संस्था ने कहा कि बांडी नदी नेहड़ा बांध क्षेत्र में कुओं का पानी भी पीने योग्य नहीं है। इससे सीधे तौर पर पथरी, चर्मरोग, इनडाइजेशन जैसी बीमारियां हो सकती हैं। जबकि लंबे समय तक पीने से यह कई खतरनाक बीमारियों का कारण बन सकता है।
गुरुवार को सीएसई ने पाली में सार्वजनिक की कुओं से लिए पानी के सैंपलों की जांच रिपोर्ट, 80 फीसदी सैंपल फेल।
आक्रोश | प्रदूषण की समस्या को लेकर किसानों ने कलेक्ट्रेट पर दिया धरना, रात 8:30 बजे तक बैठे रहे।
किसानों का आरोप- महिला शक्ति का हुआ अपमान
कलेक्टर के बाहर होने के कारण साढ़े तीन घंटे किया इंतजार, लौटे तो किसानों ने की चैंबर से बाहर आकर ज्ञापन लेने की मांग, नहीं मानने पर महिलाओं से ज्ञापन दिलवाने का प्रयास