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फाइल चलने से पहले ई-मेल पर बातचीत करेगी सरकार

7 वर्ष पहले
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मोदी सरकार ने फाइल चलने से पहले सभी जरूरी बातों को ई-मेल से ही तय करने का निश्चय किया है। सौ दिन पूरे होने पर की गई दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद की प्रेस कान्फ्रेंस में यह जानकारी दी गई। इसके मुताबिक सरकार ई-मेल को संवाद का प्राथमिक जरिया बनाने वाली है।

यानी जब तक किसी विषय पर कोई फाइल बनेगी और दफ्तरों तक पहुंचेगी, उससे पहले सरकार के वरिष्ठ अधिकारी आपस में ई-मेल के जरिए ही उस पर अपना निर्णय कर चुके होंगे। यही नहीं, यह ई-मेल सरकारी होगा। इसके लिए एनआईसी मेल का उपयोग किया जाएगा। सभी सरकारी दफ्तरों से अगले साल मार्च तक जी-मेल और याहू के प्रचलन को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। सरकार ने मार्च 2015 तक सभी सरकारी दफ्तरों में सरकारी सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए जी-मेल और याहू के साथ अन्य सभी निजी मेल सेवाएं बंद करने का फैसला कर लिया है।

रविशंकर प्रसाद ने यह भी बताया

{मप्रमें दो इलेक्ट्रानिक मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट का शिलान्यास अक्टूबर में होगा।

{इलेक्ट्रानिक मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में करीब 1860 करोड़ रुपए के प्रस्ताव सरकार के पास आए हैं।

साइबर निगरानी के लिए केंद्र

दूरसंचारऔर सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि साइबर हमलों से बचने और विभिन्न तरह की साइबर घटनाओं की निगरानी के लिए सरकार 800 करोड़ रुपए की लागत से एक राष्ट्रीय साइबर निगरानी केंद्र भी बनाने वाली है।

दिसंबर 2015 तक वाई-फाई से जुड़ेंगे यूनिवर्सिटी

देशके सभी विश्वविद्यालय को नेशनल नॉलेज नेटवर्क के तहत दिसंबर 2015 तक वाई-फाई से जोड़ा जाएगा। एक अधिकारी ने कहा कि ई-मेल के लिए डिजाइन और उसके प्रारूप को भी तय किया जा रहा है। यह कार्य अक्टूबर 2014 में ही कर लिया जाएगा।

सरकार ने समय की पाबंदी के लिए अगले महीने से सभी केंद्रीय मंत्रालयों में बायोमेट्रिक हाजिरी लगाने का फैसला किया है। इसकी निगरानी प्रधानमंत्री कार्यालय से की जाएगी। इसका परीक्षण सोमवार से शुरू किया जा रहा है। योजना के तहत किसी भी मंत्रालय में हाजिरी लगाने वाले व्यक्ति की उपस्थिति का रिकार्ड सीधे पीएमओ से देखा जा सकेगा।

बायोमेट्रिक हाजिरी का प्रयोग कल से

मोदी सरकार ई-मेल को संवाद का प्राथमिक जरिया बनाएगी

ई-मेल पर फैसले